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आदिवासी कारीगरों की कला को मिलेगा ग्लोबल मार्केट, केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने लॉन्च किया ‘RISA’ प्रीमियम ब्रांड, पारंपरिक क्राफ्ट और मॉडर्न डिज़ाइन का होगा अनोखा संगम

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🕒 Updated: 19 Mar 2026, 06:52 AM

आदिवासी कारीगरों की कला को मिलेगा ग्लोबल मार्केट, केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने लॉन्च किया ‘RISA’ प्रीमियम ब्रांड, पारंपरिक क्राफ्ट और मॉडर्न डिज़ाइन का होगा अनोखा संगम

NEW DELHI:  केंद्रीय आदिवासी मामलों (central tribal affairs) के मंत्री जुएल ओराम ने बुधवार को नई दिल्ली के सुंदर नर्सरी में हुए ‘भारत ट्राइब्स फेस्ट’ के दौरान ‘RISA टाइमलेस ट्राइबल’ ब्रांड लॉन्च(‘Timeless Tribal’ brand launched)  किया। इसका मकसद भारत की समृद्ध (Objective: India’s prosperity) और अलग-अलग तरह की आदिवासी संस्कृति को इंटरनेशनल लेवल पर प्रमोट (Promote tribal culture at the international level) करना है। इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री (Union Minister of State) सावित्री ठाकुर और कई दूसरे बड़े लोग मौजूद थे। मंत्री ओराम ने कहा कि ‘RISA’ सिर्फ एक ब्रांड नहीं है, बल्कि आदिवासी कारीगरों की सदियों पुरानी (centuries old work of tribal artisans)  कारीगरी को दुनिया तक पहुंचाने का एक ताकतवर ज़रिया है। इस पहल से उन कलाकारों को मजबूती (strength to artists) मिलेगी जिनकी कला अब तक मार्केट की पहुंच से बाहर थी, जिससे उनकी अनोखी क्रिएटिविटी को ग्लोबल (Take creativity global) पहचान मिलना तय है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

TRIFED के मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing Director) राजामुरुगन के मुताबिक, RISA ब्रांड को पारंपरिक ज्ञान और आज के ज़माने की डिज़ाइन की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। पहले फेज़ में देश भर के 10 खास क्लस्टर शामिल हैं, जिनमें एरी और मूगा सिल्क, चांगपा पश्मीना और संथाल कॉटन जैसी मशहूर बुनाई के साथ-साथ टोडा कढ़ाई और लोंगपी मिट्टी के बर्तन जैसे अनोखे क्राफ्ट (unique crafts) भी शामिल हैं। इसका मुख्य मकसद कारीगरों की क्षमता (The ability of the motive craftsmen) को हाई-वैल्यू मार्केट (High-Value Market) के लिए बनाना और उनके लिए टिकाऊ रोज़ी-रोटी के मौके बनाना है। प्लान है कि इन प्रोडक्ट्स को प्रीमियम और इको-फ्रेंडली पैकेजिंग (Eco-Friendly Packaging) के ज़रिए ग्लोबल फैशन (global fashion) और लाइफस्टाइल के सेंटर (Lifestyle Center) में लाया जाए।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इस प्रोजेक्ट (project) के तहत, आदिवासी महिलाओं (tribal women) और कारीगरों को सीधे मार्केट से जोड़कर (by connecting to the market)  उनकी इनकम बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर (financially self-reliant)  बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। आदिवासी अधिकार एक्सपर्ट (tribal rights expert) डॉ. बिक्रांत तिवारी ने इस कदम की तारीफ़ करते हुए कहा कि ‘RISA’ की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह ज़मीनी स्तर पर रोज़गार को कितना मज़बूत करता है। मिनिस्ट्री का मकसद डिज़ाइन इनोवेशन (Ministry’s aim is design innovation) के ज़रिए खत्म हो रहे पारंपरिक क्राफ्ट (traditional craft) को फिर से ज़िंदा करना है। यह मॉडल न सिर्फ़ भारत की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित (Protecting India’s cultural identity0  रखेगा, बल्कि यह भी पक्का करेगा कि प्रकृति से जुड़े इन समुदायों की कला को सही मायने में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहमियत (International importance) और सम्मान मिले।

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