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अमेरिका का फैलाया रायता साफ नहीं करेगा जर्मनी! ट्रंप के होर्मुज प्लान में शामिल न होने के संकेत

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🕒 Updated: 16 Mar 2026, 06:22 AM

अमेरिका का फैलाया रायता साफ नहीं करेगा जर्मनी! ट्रंप के होर्मुज प्लान में शामिल न होने के संकेत

जर्मनी ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में मिलिट्री मिशन में हिस्सा (participate in military mission) लेने से मना कर दिया, विदेश मंत्री (Foreign Minister) वेडफुल ने कहा कि डिप्लोमेसी और बातचीत ही एकमात्र समाधान (the only solution) है, जबकि US एक अलायंस बनाने की कोशिश (Trying to form an alliance) कर रहा है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जर्मनी ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में किसी भी संभावित मिलिट्री मिशन (possible military mission) में हिस्सा लेने से मना कर दिया है। जर्मन विदेश मंत्री जोहान वेडफुल ने ARD टेलीविज़न को दिए एक इंटरव्यू में साफ (clear in interview) किया कि बर्लिन फिलहाल (Berlin currently) इस इलाके में कोई एक्टिव मिलिट्री रोल नहीं निभाएगा Will not play an active military role)। उन्होंने कहा, “क्या हम जल्द ही इस लड़ाई का हिस्सा बनने वाले हैं? नहीं।”

 

 

 

 

 

 

 

 

वेडफुल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा (Security of the Strait of Hormuz) सिर्फ बातचीत और डिप्लोमैटिक तरीकों (Diplomatic methods) से ही पक्की की जा सकती है। उन्होंने मौजूदा EU नेवल मिशन ‘ऑपरेशन एस्पाइड्स’ का भी ज़िक्र किया और इसके असर पर शक जताया। वेडफुल ने कहा कि इसके होर्मुज तक फैलने की उम्मीद (Expected to spread to Hormuz) कम है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ऑपरेशन एस्पाइड्स क्या है?
ऑपरेशन एस्पाइड्स (Operation Aspides) फरवरी 2024 में शुरू किया गया था और इसका मकसद रेड सी (Purpose Red Sea) में यमनी हूथी विद्रोहियों के कमर्शियल जहाजों पर हमलों से सुरक्षा (Protection against attacks on commercial ships by rebels) देना है। यह मिशन एक डिफेंसिव फ्रेमवर्क के तहत इंटरनेशनल कानून (Mission within a defensive framework of international law) के हिसाब से काम करता है। लेकिन वेडफुल ने ARD को बताया कि यह मिशन अपने मौजूदा इलाके में भी पूरी तरह असरदार (effective) नहीं था।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

होर्मुज स्ट्रेट में हालात तनावपूर्ण
जर्मनी का यह बयान (statement) ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव (tension in the middle east) बढ़ गया है। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष का असर होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग (Shipping in the Strait of Hormuz) पर पड़ रहा है, जो ग्लोबल तेल सप्लाई का लगभग 20-30 परसेंट संभालता है। अमेरिका और इज़राइल ने जॉइंट मिलिट्री ऑपरेशन (joint military operation) के तहत ईरान की मिलिट्री क्षमताओं, खासकर न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को निशाना (target missile program) बनाया है, लेकिन जर्मनी ने खुद को ऐसी मिलिट्री कार्रवाई (military action)  से दूर रखा है। ट्रंप ने सात देशों से मदद मांगी

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