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ईरान-इज़राइल युद्ध के 17वें दिन भारी बमबारी, इज़राइल ने 200 मिलिट्री बेस तबाह किए, डोनाल्ड ट्रंप ने तेल के इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने की चेतावनी दी

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🕒 Updated: 16 Mar 2026, 10:45 AM

ईरान-इज़राइल युद्ध के 17वें दिन भारी बमबारी, इज़राइल ने 200 मिलिट्री बेस तबाह किए, डोनाल्ड ट्रंप ने तेल के इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने की चेतावनी दी

ईरान पर US-इज़राइल का मिला-जुला हमला 17वें दिन में पहुँच गया है और लड़ाई कम होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है। इज़राइली एयर फ़ोर्स (air force) (IAF) ने कन्फ़र्म किया है कि पिछले 24 घंटों में पश्चिमी और मध्य ईरान में 200 से ज़्यादा ठिकानों पर भारी बमबारी की गई है। इस मिलिट्री कार्रवाई (military action) में ईरान के मिसाइल सिस्टम (Iran’s missile systems) , डिफ़ेंस ठिकानों (defense bases) और स्ट्रेटेजिक ऑपरेशनल हेडक्वार्टर (Strategic Operational Headquarters) को निशाना बनाया गया है, जिससे उन्हें भारी नुकसान (huge loss) हुआ है। युद्ध के बढ़ते दायरे ने खाड़ी देशों में असुरक्षा का माहौल बना दिया है, जिससे दुनिया भर में चिंताएँ (Concerns around the world) बढ़ गई हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने तेहरान को सख़्त लहजे में चेतावनी दी है कि अगर ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट के ज़रिए शिपिंग में रुकावट (shipping interruption) डालना बंद नहीं करता है, तो अगला निशाना ईरान का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर (Iran’s oil infrastructure)  होगा। ट्रंप ने NATO देशों से भी मदद की अपील की है, उनका दावा है कि खार्ग आइलैंड पर मिलिट्री बेस (military base) पूरी तरह तबाह हो गए हैं। उन्होंने साफ़ किया कि अगर दुनिया की बड़ी ताकतें (major world powers) इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित (secure sea lanes) करने में साथ नहीं देतीं, तो इसके नतीजे बहुत बुरे होंगे। साथ ही, उन्होंने चीन, फ्रांस और जापान जैसे देशों से होर्मुज में अपने जंगी जहाज़ भेजने की अपील (Appeal to send warships) की है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री (Foreign Minister) अब्बास अराघची ने अमेरिका पर UAE की जगहों का इस्तेमाल करके हमले करने का गंभीर आरोप (serious assault charge) लगाया है। अराघची के मुताबिक, अमेरिका ने दुबई और रास अल-खैमाह के पास से खरग और अबू मूसा द्वीपों को निशाना बनाया, जिसे उन्होंने बहुत ‘खतरनाक’ कदम बताया। ईरानी लीडरशिप (Iranian leadership) ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दूसरे देशों से मांगी गई मदद को ‘भीख’ बताया है और पड़ोसी देशों से इस इलाके से विदेशी सेना हटाने की अपील की है। फिलहाल, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान (US Central Command Iran) के इन दावों पर कोई ऑफिशियल जवाब (official answer) देने से मना कर दिया है।

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