🕒 Updated: 19 Jul 2026, 07:21 AM
Mauganj MP:रात 10:45 बजे जिला पंचायत का आदेश, पूर्व सचिव की DSC हुई सक्रिय! प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद बदले सचिव की DSC रही बंद, अगले दिन 6 लाख रुपये का भुगतान बना चर्चा का विषय!
आधी रात में जिला पंचायत का आदेश, सुबह लाखों का भुगतान! प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से बदले सचिव को दरकिनार करने के आरोप, खटखरी पंचायत में 2.27 करोड़ के कथित घोटाले के बीच DSC विवाद ने पकड़ा तूल!
मऊगंज।मऊगंज जिले के जनपद पंचायत हनुमना की खटखरी ग्राम पंचायत एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार विवाद पंचायत के विकास कार्यों का नहीं, बल्कि डिजिटल वित्तीय अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा है। आरोप है कि प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद सचिव परिवर्तन प्रभावी होने के बावजूद रीवा जिला पंचायत ने देर रात 10:45 बजे आदेश जारी कर पूर्व सचिव की डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) पुनः सक्रिय कर दी। इसके अगले ही दिन पंचायत खाते से करीब 6 लाख रुपये का भुगतान होने की जानकारी सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद भी बदला फैसला?
जानकारी के अनुसार, शासन स्तर पर प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद ग्राम पंचायत में नए सचिव की पदस्थापना कर दी गई थी। सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के तहत पंचायत के वित्तीय कार्य नए सचिव की DSC के माध्यम से संचालित होने चाहिए थे। लेकिन आरोप है कि जिला पंचायत ने नए सचिव की DSC सक्रिय करने के बजाय पूर्व सचिव की DSC पुनः चालू करने का आदेश जारी कर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठ रहा है कि जब सचिव परिवर्तन प्रभावी हो चुका था, तब पूर्व सचिव को दोबारा वित्तीय अधिकार देने की आवश्यकता क्यों पड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसके पीछे कोई वैधानिक या प्रशासनिक कारण था, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
आधी रात का आदेश बना चर्चा का विषय
पूरे मामले का सबसे चर्चित पहलू आदेश जारी होने का समय है। आरोप है कि संबंधित आदेश रात 10:45 बजे, यानी कार्यालयीन समय समाप्त होने के बाद जारी किया गया। सामान्यतः ऐसे प्रशासनिक आदेश कार्यालय समय में जारी किए जाते हैं। ऐसे में ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसी कौन-सी आपात स्थिति थी, जिसके कारण देर रात डिजिटल हस्ताक्षर संबंधी आदेश जारी करना आवश्यक हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई विशेष परिस्थिति थी, तो उसका उल्लेख आदेश अथवा प्रशासनिक अभिलेखों में स्पष्ट रूप से होना चाहिए था।
DSC सक्रिय होते ही अगले दिन करीब 6 लाख रुपये का भुगतान
ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व सचिव की DSC सक्रिय होने के महज 24 घंटे के भीतर पंचायत खाते से लगभग 6 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि यह भुगतान किन कार्यों के लिए किया गया, किन एजेंसियों अथवा हितग्राहियों को राशि जारी की गई तथा क्या सभी निर्धारित वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरा भुगतान नियमानुसार हुआ है, तो उससे संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम या संदेह समाप्त हो सके।





