Rewa MP:नल-जल योजना में भ्रष्टाचार का आरोप, EOW ने संजय पाण्डेय, इंजीनियर और ठेकेदार समेत चार के खिलाफ दर्ज की FIR!
बिना काम पूरा किए ₹3.85 करोड़ भुगतान का मामला, घटिया निर्माण से नई पानी की टंकी पहली बारिश में हुई धरासाई कई गांवों में अब तक नहीं पहुंचा नल का पानी
रीवा। जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल का पानी पहुंचाने की योजना में कथित अनियमितताओं और गुणवत्ताविहीन निर्माण को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। मऊगंज जिले के नईगढ़ी विकासखंड में नल-जल योजना के कार्यों में अनियमितता के आरोप में तत्कालीन अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज कर प्रकरण को विवेचना में लिया गया है। दी गई जानकारी के अनुसार, कार्य पूर्ण किए बिना ही ठेकेदार को करीब ₹3 करोड़ 85 लाख 900 रुपये का भुगतान किए जाने का आरोप है।
कागजों में दिख रहा कार्य, जमीन पर अधूरा काम!
मामला वर्ष 2021 में जल जीवन मिशन के अंतर्गत नईगढ़ी विकासखंड के विभिन्न गांवों में हर घर नल के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कराए गए निर्माण कार्यों से जुड़ा है। योजना के तहत पानी की टंकियों, पाइपलाइन, पंप हाउस, विद्युत फिटिंग, मोटर पंप, हाउस होल्ड कनेक्शन सहित अन्य कार्य कराए जाने थे। बताया गया है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों एवं ठेकेदार द्वारा योजना के कार्यों में मिलीभगत कर गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य कराए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। सत्यापन के दौरान कई स्तरों पर काम की गुणवत्ता और उपयोगिता को लेकर गंभीर खामियां सामने आने का उल्लेख किया गया है।
नईगढ़ी के खटखरी में पहली बारिश में धराशायी हुई पानी की टंकी
जांच में सामने आए बिंदुओं में नईगढ़ी तहसील अंतर्गत खटखरी गांव में नव निर्मित पानी की टंकी का पहली बारिश में टूटकर गिर जाना प्रमुख है। इसके अलावा अनुमान के अनुसार 4400 मीटर पाइपलाइन बिछाने और 315 घरेलू नल कनेक्शन देने का प्रावधान दर्शाया गया था, लेकिन जांच में आरोप है कि पाइपलाइन गांव के बाहर तक ही निकाली गई और घरों के भीतर न तो नल फिटिंग की गई और न ही स्कलर स्टैंड पोस्ट तैयार किए गए। जिसकी वजह से योजना के मूल उद्देश्य यानी ग्रामीण परिवारों तक नियमित पेयजल पहुंचाने पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
कई गांवों में अधूरे कार्य, ग्रामीणों को नहीं मिला योजना का लाभ
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत जुडमनिया रघुनाथ में मुख्य पाइपलाइन तो डाली गई, लेकिन घरों के अंदर कनेक्शन नहीं किए गए। मुख्य पाइपलाइन आधे गांव में ही बिछाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इसी तरह ग्राम करह में पांच मोटर पंप के स्थान पर केवल एक सबमर्सिबल मोटर, जबकि 740 कनेक्शन के दावों के विपरीत एक भी घर के अंदर नल फिटिंग नहीं मिलने का उल्लेख किया गया है। ग्राम शिवराजपुर में ओवरहेड टैंक और सम्पवेल का निर्माण अधूरा पाए जाने की बात भी दस्तावेज में कही गई है।
टेंडर की न्यूनतम दर पर मिला काम, फिर भी हुआ करोड़ों का भुगतान
दस्तावेजों के अनुसार, उक्त कार्य न्यूनतम निविदा दर से 4.26 प्रतिशत बिलो दर के आधार पर ठेकेदार मैसर्स शिवेन्द्र तिवारी को दिया गया था। निर्माण कार्य के लिए करीब ₹3,85,00,900 की राशि का भुगतान लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के संभाग मऊगंज द्वारा किए जाने का उल्लेख है। जांच में आरोप है कि ठेकेदार द्वारा गुणवत्ताविहीन और अधूरे निर्माण कार्य कराए गए, जिसके बावजूद भुगतान प्राप्त किया गया। इससे सरकारी राशि के उपयोग और योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
योजना में कई तरह के निर्माण कार्य शामिल थे
जल जीवन मिशन के तहत संबंधित गांवों में अर्थवर्क, रोड कटिंग, एचडीपीई पाइप फिटिंग, पंप हाउस निर्माण, वाल्व चेंबर, ऑटोमेटिक वाटर लेवल इंडिकेटर, सबमर्सिबल मोटर पंप की स्थापना, बिजली फिटिंग, हाउस होल्ड कनेक्शन के लिए जीआई पाइप, कंक्रीट स्कलर स्टैंड पोस्ट, नल फिटिंग, राइजिंग मेन की फिटिंग तथा स्टार्ट कंट्रोल पैनल की स्थापना जैसे कार्य किए जाने थे। लेकिन जांच में कई स्थानों पर इन कार्यों के अधूरे या गुणवत्ताविहीन होने का उल्लेख किया गया है।
चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
दी गई जानकारी के अनुसार पूरे मामले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जे.पी. द्विवेदी, तत्कालीन सहायक यंत्री संजय पाण्डेय, तत्कालीन उपयंत्री ए.पी. तिवारी तथा ठेकेदार शिवेन्द्र कुमार तिवारी, पिता हीरालाल तिवारी, निवासी प्रभाती पुरवा तहसील मनगवां, जिला रीवा के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। इनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 316(5), 318(4), 61(2) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7(सी), 13(1), 13(2) के तहत आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
अब जांच में तय होगा सरकारी धन और योजना की जिम्मेदारी का सच
EOW की कार्रवाई के बाद अब मामले की विवेचना में यह स्पष्ट होना है कि स्वीकृत कार्यों में वास्तविक रूप से कितना काम हुआ, किन स्तरों पर गुणवत्ता में लापरवाही बरती गई और भुगतान की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका रही। दस्तावेज में वर्णित आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है; आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी,फिलहाल EOW की FIR ने जल जीवन मिशन के तहत हुए निर्माण कार्यों और करोड़ों रुपये के भुगतान को जांच के केंद्र में ला दिया है।





