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US टैरिफ से भारतीय शेयर बाज़ारों में भारी तबाही, सेंसेक्स 1,119 पॉइंट टूटा, निवेशकों के 3.2 लाख करोड़ रुपये डूबे?

By: संवाददाता । विराट वसुंधरा

On: Thursday, February 26, 2026 7:32 AM

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🕒 Updated: 26 Feb 2026, 07:32 AM

US टैरिफ से भारतीय शेयर बाज़ारों में भारी तबाही, सेंसेक्स 1,119 पॉइंट टूटा, निवेशकों के 3.2 लाख करोड़ रुपये डूबे?

SHARE MARKET:  भारतीय शेयर बाज़ारों में उथल-पुथल (Turmoil in Indian stock markets)  रही, जिसमें प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स (Major index Sensex)  और निफ्टी 1 परसेंट से ज़्यादा गिरे। दोपहर के कारोबार तक, सेंसेक्स $1.34 परसेंट या $1,119.80 पॉइंट गिरकर $82,174.86 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी $311.70 पॉइंट फिसलकर $25,400.90 पर ट्रेड कर रहा था। इस ज़बरदस्त बिकवाली के कारण, BSE (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप (Total market cap of companies) कुछ ही घंटों में 3.23 ट्रिलियन रुपये (trillion rupees) गिरकर 465.31 ट्रिलियन रुपये रह गया, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान (huge loss to investors)  हुआ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ और भविष्य की अनिश्चितता बाज़ार में गिरावट के मुख्य कारण हैं। इसका सबसे बुरा असर IT (IT) सेक्टर पर पड़ा, जहाँ निफ्टी IT इंडेक्स $5 परसेंट से ज़्यादा टूट गया। टेक महिंद्रा के शेयर $7$ परसेंट गिरे, जबकि इंफोसिस, TCS और HCL टेक जैसे बड़े स्टॉक्स में भी ज़बरदस्त बिकवाली देखी गई। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि US की नई ट्रेड पॉलिसी और AI (AI) पर बदलती निगरानी ने टेक कंपनियों के भविष्य पर सवालिया निशान (Question marks over the future of tech companies) लगा दिए हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

IT के अलावा, रियल्टी (realty) और केमिकल सेक्टर के स्टॉक्स (Chemical sector stocks) भी आज गहरे लाल निशान पर ट्रेड (Trade in the deep red) कर रहे थे। हालांकि, इस मार्केट गिरावट (market decline) के बीच निफ्टी फार्मा इंडेक्स (nifty pharma index) ने कुछ राहत दिखाई, जिसमें सन फार्मा जैसे स्टॉक्स में बढ़त (rise in stocks)  देखी गई। इसके अलावा, HUL और NTPC जैसे स्टॉक्स में मामूली खरीदारी देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स (smallcap index)  में भी $1$ परसेंट से ज़्यादा की कमजोरी रही। एनालिस्ट्स के मुताबिक, जब तक इंटरनेशनल ट्रेड पॉलिसीज़ (international trade policies) पर स्थिति साफ नहीं हो जाती, मार्केट में इसी तरह का उतार-चढ़ाव (ups and downs) और दबाव (Pressure) बना रहने की संभावना है।

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