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Mauganj MP’पॉकेट गवाह’ कांड: विधानसभा में पुलिस के सफेद झूठ का फूटा बम्ब! विधायक अजय सिंह के सवालों से खुली खाकी की पोल,मऊगंज पुलिस ने तथ्यों और वास्तविकता को छिपाकर गृह विभाग को भेजी गलत जानकारी।

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🕒 Updated: 30 Jul 2026, 08:20 AM

Mauganj MP’पॉकेट गवाह’ कांड: विधानसभा में पुलिस के सफेद झूठ का फूटा बम्ब! विधायक अजय सिंह के सवालों से खुली खाकी की पोल,मऊगंज पुलिस ने तथ्यों और वास्तविकता को छिपाकर गृह विभाग को भेजी गलत जानकारी।

 

 

अजय सिंह राहुल के विधानसभा प्रश्नों पर मऊगंज पुलिस ने भेजी गलत जानकारी ,उपलब्ध दस्तावेजों और गृह विभाग के जवाबों में दिखा बड़ा विरोधाभास

मऊगंज ।जिले के हनुमना थाने के बहुचर्चित ‘पॉकेट गवाह’ सिंडिकेट में पुलिस की कार्यप्रणाली अब पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। सुपरमैन की तर्ज पर 50 मिनट में 6 अलग-अलग जगहों पर गवाही देने वाले सूर्यमणि मिश्रा और राजेश साकेत के मामले में पुलिस अधिकारियों ने न केवल जनता को, बल्कि लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर ‘विधानसभा’ को भी गुमराह करने का दुस्साहस किया है।
चुरहट विधायक और कद्दावर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह (राहुल) के द्वारा विधानसभा में लगाए गए अतारांकित प्रश्न क्रमांक 136 ने पुलिस महकमे की लीपापोती की पोल खोल दी है। गृह विभाग (जिसके मुखिया स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हैं) के माध्यम से पुलिस ने जो जवाब पेश किए हैं, वे सिटिजन पोर्टल के दस्तावेजों और ऑन-कैमरा बयानों के सामने पूरी तरह झूठे साबित हो रहे हैं।

 

 

 

आइए सिलसिलेवार तरीके से देखते हैं विधायक के सवाल, सरकार का जवाब और हकीकत:

(क) 50 मिनट, 50 किमी और 6 एफआईआर का सच

अजय सिंह का सवाल: क्या हनुमना थाने में पुलिस द्वारा मात्र 50 मिनट के अंतराल में 50 किलोमीटर के दायरे में 6 अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई दिखाकर एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें गवाह एक ही व्यक्ति हैं?
– गृह विभाग का उत्तर:”जी नहीं।”
– हकीकत :सिटिजन पोर्टल से प्राप्त एफआईआर की प्रमाणित कॉपियां चीख-चीख कर गवाही दे रही हैं कि 50 मिनट के भीतर 6 मामले दर्ज किए गए और उन सभी में राजेश साकेत और सूर्यमणि मिश्रा गवाह के रूप में मौजूद हैं। सवाल यह है कि पोर्टल पर मौजूद इस पुख्ता प्रमाण को विधानसभा में क्यों झुठलाया गया?

(ख) 300 मामलों का ‘गवाह’ और छिपाई गई संगीन हकीकत

अजय सिंह का सवाल: क्या सूर्यमणि मिश्रा एवं राजेश साकेत को वर्ष 2020 से अब तक 300 से अधिक मामलों में पुलिस द्वारा स्वतंत्र गवाह बनाया गया है? (जबकि नियमानुसार गवाह स्थानीय और स्वतंत्र होना चाहिए)
– गृह विभाग का उत्तर: सूर्यमणि मिश्रा को 300 से अधिक मामलों में केवल माइनर एक्ट (मुख्यतः आबकारी) में गवाह बनाया गया है और राजेश साकेत को केवल 18 मामलों में।
– हकीकत इससे कोसों दूर है। दस्तावेजों के मुताबिक राजेश साकेत 35 मामलों में गवाह है, जिनमें एनडीपीएस एक्ट (FIR क्र. 0528/2025),और ट्रैक्टर चोरी (FIR क्र. 0107/2026) जैसे संगीन मामले शामिल हैं।
वहीं, सूर्यमणि मिश्रा को सिर्फ आबकारी नहीं, बल्कि 203 किलो गांजा जब्ती (FIR क्र. 0090/2020), लूट की (FIR क्र. 0202/2021), रास्ता रोकने,(FIR क्र. 0099/2021)और चोरी की योजना,(FIR क्र. 0105/2021) जैसे गंभीर अपराधों में गवाह बनाया गया है। जब पुलिस ने लूट और एनडीपीएस जैसे बड़े मामलों में इन्हें गवाह बनाया, तो विधानसभा में इसे क्यों छिपाया गया?

(ग) थाना प्रभारी का ड्राइवर और ऑन-कैमरा कबूलनामा

अजय सिंह का सवाल: क्या उक्त गवाहों में से एक व्यक्ति हनुमना थाना प्रभारी का निजी चालक है, जिसने स्वयं स्वीकार किया है कि उसे मामलों की जानकारी नहीं है, वह केवल हस्ताक्षर करता है?
– गृह विभाग का उत्तर:”जी नहीं।”
– हकीकत , कैमरों के सामने राजेश साकेत ने स्वयं कबूल किया था कि वह तत्कालीन थाना प्रभारी अनिल काकड़े की सरकारी गाड़ी चलाता है और बिना कुछ जाने सिर्फ कागजों पर दस्तखत करता है। सूर्यमणि मिश्रा भी कैमरे पर फर्जी गवाही की बात स्वीकार कर चुका है। वीडियो साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद विधानसभा में इतना बड़ा झूठ कैसे परोसा गया?

(घ) जांच का दिखावा या होगी कार्रवाई?

अजय सिंह का सवाल: क्या शासन पुलिस विभाग की साख को प्रभावित करने वाले इस फर्जी गवाह घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराएगी और दोषी थाना प्रभारी एवं अन्य अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही करेगी?
– गृह विभाग का उत्तर:”जी हां, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा जांच की जा रही है।

 

 

सबसे बड़ा सवाल

जब गृह विभाग स्वयं प्रदेश के मुखिया के पास है, तब भी पुलिसकर्मियों द्वारा विधानसभा में गलत जानकारी परोसने की जुर्रत किसने की? लूट, डकैती और एनडीपीएस के मामलों में गवाहों की एंट्री को छिपाने का प्रयास किस अधिकारी ने किया और किसे बचाने के लिए किया?
यह घोटाला सिर्फ दो ‘पॉकेट गवाहों’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बता रहा है कि थानों में फर्जी गवाहों के दम पर कैसे निर्दोषों को फंसाया और मामलों को रफा-दफा किया जाता है। अब देखना यह है कि विधानसभा को सरेआम गुमराह करने वाले इन वर्दीधारियों पर सिर्फ जांच की फाइलें धूल खाएंगी, या फिर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई होगी!

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