दुनिया के इतिहास में कुछ चीजें सिर्फ धन या आभूषण नहीं होतीं, बल्कि वे सत्ता, युद्ध और साम्राज्यों के उत्थान पतन की गवाह बन जाती हैं। कोहिनूर हीरा भी ऐसा ही एक नाम है, जिसने सदियों तक राजाओं की नींद उड़ाए रखी। इसे पाने के लिए खून बहा, खजाने उजड़े और पूरे-पूरे राज्य खत्म हो गए। कोहिनूर को सिर्फ एक कीमती हीरा नहीं, बल्कि शक्ति और प्रभुत्व का प्रतीक माना गया। यही वजह है कि जिसने भी इसे अपने पास रखा, उसने खुद को सबसे ताकतवर समझा। लगभग सात सौ साल पुराने इस हीरे की कहानी आज भी लोगों को हैरान करती है और यह सवाल बार-बार उठता है कि आखिर कोहिनूर कितनी बार लूटा गया और इसकी कीमत कितनी है।
गोलकुंडा से दिल्ली तक, कोहिनूर का शुरुआती सफर
इतिहासकारों के अनुसार कोहिनूर हीरा आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा क्षेत्र की कोल्लूर खदान से निकला था। शुरुआती दौर में यह हीरा वारंगल के काकतीय राजवंश के पास था। कहा जाता है कि काकतीय शासकों ने इसे देवी भद्रकाली को समर्पित किया था। लेकिन सत्ता की भूख ने इसे मंदिर से निकालकर युद्ध के मैदान तक पहुंचा दिया। 1304 में दिल्ली सल्तनत के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने वारंगल पर हमला कर इस हीरे को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद कोहिनूर दिल्ली सल्तनत के खजाने की शान बन गया। 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई के बाद यह हीरा मुगल शासक बाबर के हाथ लगा और फिर मुगलों के खजाने में शामिल हो गया। शाहजहां ने इसे अपने भव्य मयूर सिंहासन में जड़वाकर इसकी शान को और बढ़ा दिया।
नादिर शाह से रणजीत सिंह तक, लूट और सत्ता का खेल
1739 में कोहिनूर की कहानी ने एक और खतरनाक मोड़ लिया जब ईरान के शासक नादिर शाह ने दिल्ली पर हमला किया। उसने मुगल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीला से कोहिनूर लूट लिया। कहा जाता है कि हीरे की चमक देखकर नादिर शाह के मुंह से ‘कोह-ए-नूर’ यानी रोशनी का पहाड़ निकला और तभी से यह नाम दुनिया में मशहूर हो गया। नादिर शाह की हत्या के बाद यह हीरा अफगानिस्तान पहुंचा और दुर्रानी वंश के पास रहा। बाद में अफगान शासक शुजा शाह दुर्रानी ने यह हीरा सिख साम्राज्य के शासक महाराजा रणजीत सिंह को सौंप दिया। रणजीत सिंह ने इसे अपने सबसे कीमती खजानों में शामिल किया और सिख साम्राज्य की ताकत का प्रतीक बना दिया।
अंग्रेजों से लेकर आज तक, कोहिनूर की कीमत और विवाद
1849 में दूसरे आंग्ल-सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब पर कब्जा कर लिया और कम उम्र के महाराजा दलीप सिंह से कोहिनूर हीरा छीन लिया गया। इसके बाद यह हीरा इंग्लैंड पहुंचा और ब्रिटिश राजघराने की संपत्ति बन गया। आज कोहिनूर ब्रिटेन के शाही ताज में जड़ा हुआ है और लंदन के टॉवर में सुरक्षित रखा गया है। इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अहमियत इतनी ज्यादा है कि इसे बेचा नहीं जा सकता, इसलिए इसका कोई आधिकारिक बाजार मूल्य नहीं है। फिर भी विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी कीमत 1 बिलियन डॉलर से लेकर 6 बिलियन डॉलर तक आंकी जाती है, यानी भारतीय मुद्रा में करीब 8,000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये तक। कुछ आकलन तो इसे 1.67 लाख करोड़ रुपये तक बताते हैं। इतनी रकम में हजारों किलो सोना खरीदा जा सकता है या दुबई की बुर्ज खलीफा जैसी कई गगनचुंबी इमारतें खड़ी की जा सकती हैं। यही वजह है कि कोहिनूर आज भी सिर्फ एक हीरा नहीं, बल्कि इतिहास का सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।





