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ईरान युद्ध के बीच भारत की बड़ी डिप्लोमैटिक जीत, जयशंकर-अराघची बातचीत के बाद भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से ‘सेफ पैसेज’ मिला, तेल संकट से राहत

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🕒 Updated: 12 Mar 2026, 06:58 AM

ईरान युद्ध के बीच भारत की बड़ी डिप्लोमैटिक जीत, जयशंकर-अराघची बातचीत के बाद भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से ‘सेफ पैसेज’ मिला, तेल संकट से राहत

NEW DELHI:   US-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध (fierce battle) के 13वें दिन भारत के लिए बड़ी राहत की खबर (Big relief news for India)  है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी काउंटरपार्ट (Iranian counterpart) अब्बास अराघची के बीच हाई-लेवल बातचीत के बाद, ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को स्ट्रेटेजिक रूप (Iran has strategically deployed Indian-flagged ships.) से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ से सुरक्षित रूप (safe form) से गुजरने की इजाजत दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय टैंकर (Indian tanker)  ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ इस समुद्री रास्ते से सफलतापूर्वक (successfully by sea) और सुरक्षित रूप से गुजर (pass safely) चुके हैं। यह डेवलपमेंट (development) ऐसे समय में हुआ है जब ईरान ने U.S. और इजरायली हितों (israeli interests) से जुड़े जहाजों (connected ships) पर कड़े बैन लगाए हैं और समुद्री ट्रैफिक लगभग ठप (Sea traffic virtually halted) है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

युद्ध से ग्लोबल तेल सप्लाई (Global oil supply from war) चेन बुरी तरह प्रभावित (Chen badly affected) हुई है, जिससे भारत में कुकिंग गैस (cooking gas in india) और फ्यूल की कमी और बढ़ गई थी। इस संकट (crisis) को देखते हुए, विदेश मंत्री (Foreign Minister)  जयशंकर ने पिछले कुछ दिनों में ईरानी विदेश मंत्री (Iranian Foreign Minister in days) के साथ तीन बार डिटेल में बातचीत की। इस डिप्लोमैटिक एक्टिविज़्म का मकसद  (The purpose of diplomatic activism) यह पक्का करना था कि भारत की एनर्जी ज़रूरतों (India’s energy needs) पर असर न पड़े। ईरान ने साफ़ कर दिया है कि जो जहाज़ U.S. या इज़राइल के फ़ायदे में नहीं हैं, वे इजाज़त लेकर इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस एग्रीमेंट (agreement) के बाद, अब खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल (crude oil) और LPG जहाज़ों के लिए यह रास्ता साफ़ (This path is clear for LPG ships) होने की उम्मीद है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे झगड़े (fights) में अब तक हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग बेघर (millions of people homeless) हो गए हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (International Energy Agency) ने इज़राइली इलाकों और U.S. मिलिट्री बेस पर ईरान के हमलों के जवाब में अपने इमरजेंसी तेल रिज़र्व (emergency oil reserve) से 400 मिलियन बैरल तेल छोड़ने का फ़ैसला किया है। भारत के लिए चिंता की बात यह थी कि दुनिया के कुल तेल व्यापार (oil trade) का पाँचवाँ हिस्सा इसी होर्मुज़ रास्ते से गुज़रता (passes through the Strait of Hormuz) है। हालाँकि भारत ने रूस से तेल का इंपोर्ट (India imports oil from Russia) बढ़ाकर सप्लाई पर कब्ज़ा करने की कोशिश की है, लेकिन ईरान के साथ यह एग्रीमेंट खाड़ी देशों से गैस और फ़र्टिलाइज़र की सप्लाई (Supply of fertilizers) फिर से शुरू करने के लिए बहुत ज़रूरी माना जा रहा है।

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