सोना और चांदी की कीमतों में भारी ऐतिहासिक गिरावट, रिकॉर्ड ऊंचाई से औंधे मुंह फिसलीं कीमती धातुएं, खरीदारों के लिए निवेश और गहने खरीदने का सुनहरा मौका
GOLD AND SILVER PRICE: आज भारतीय वायदा बाजार (Indian futures market) (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट (Silver prices fall sharply) आई, जिससे ज्वेलरी खरीदार (jewelery buyer) सदमे में हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर गोल्ड बेंचमार्क (Gold Benchmark on Multi Commodity Exchange) अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट ₹327 गिरकर ₹1,55,658 पर खुला, जो अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। इस बीच, चांदी मई वायदा में भी भारी बिकवाली (heavy selling) देखी गई और यह ₹2,107 की बड़ी गिरावट के साथ ₹2,51,006 पर कारोबार कर रही है। बाजार के जानकारों का मानना है कि कीमतों में यह ‘करेक्शन’ ग्लोबल आर्थिक संकेतों (global economic signals) और ऊंची कीमतों पर निवेशकों (investors at high prices) द्वारा किए गए मुनाफावसूली के कारण है।
ग्लोबल बाजारों में भी कीमती धातुओं (Precious metals also in global markets) पर दबाव साफ दिख रहा है। COMEX (कॉमेक्स) पर सोना $5,000 के साइकोलॉजिकल लेवल (Psychological level) से नीचे फिसलकर $4,994.40 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी भी $78.46 पर बनी हुई थी। गिरावट के पीछे मुख्य कारण US फेडरल रिजर्व (federal Reserve) की आने वाली पॉलिसी और डॉलर इंडेक्स (dollar index) का मजबूत होना है। इंटरनेशनल लेवल पर इन्वेस्टर्स (Investors at the international level) के रुख में बदलाव का सीधा असर इंडियन मार्केट (Indian Market) पर पड़ा है, जिससे शादियों के सीजन के बीच रिकॉर्ड तोड़ कीमतों (Record-breaking prices amid wedding season) से कस्टमर्स को कुछ राहत मिली है।
मार्केट एक्सपर्ट्स (Market Experts) के मुताबिक, कीमतों में इस उतार-चढ़ाव ने लोकल कस्टमर्स और बड़े इन्वेस्टर्स (big investors) को ‘इंतजार करो और देखो’ वाली सिचुएशन में डाल दिया है। हालांकि, रिकॉर्ड हाई से नीचे आ रही कीमतों को खरीदने के बेहतर मौके के तौर पर देखा जा रहा है। अगर आने वाले दिनों में यह गिरावट जारी (decline continues) रहती है, तो रिटेल मार्केट में सोने और चांदी की ज्वेलरी की डिमांड में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। फिलहाल, एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं कि लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स को हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा इन्वेस्ट करना चाहिए, क्योंकि ग्लोबल अनिश्चितताओं (global uncertainties) के बीच कीमती मेटल्स अभी भी एक सेफ इन्वेस्टमेंट का तरीका बने हुए हैं।





