अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार ₹93.24 के पार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने घरेलू मुद्रा को ऐतिहासिक निचले स्तर पर धकेला
दुनिया भर (around the world) में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical tensions) और सप्लाई चेन (supply chainमें रुकावटों के बीच शुक्रवार को भारतीय रुपया US डॉलर (Indian Rupee US Dollar) के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली (Heavy selling in early trade) के चलते रुपया पहली बार $93.12$ के लेवल को पार कर गया। बुधवार को यह $92.63$ के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद (Closed at a record low) हुआ था, लेकिन शुक्रवार को इसमें $0.55\%$ की और गिरावट आई। मार्केट एक्सपर्ट्स (Market Experts) का कहना है कि जब से वेस्ट एशिया (west asia) (मिडिल ईस्ट) में टकराव तेज हुआ है, भारतीय करेंसी (indian currency) करीब $2\%$ तक कमजोर हो गई है, जो इंपोर्टर्स के लिए बहुत चिंता की बात है।
हैरानी की बात है कि रुपये में अब तक की गिरावट (decline) के बावजूद, घरेलू शेयर बाजारों (domestic stock markets) में तेजी रही, सेंसेक्स 900 पॉइंट्स और निफ्टी 300 पॉइंट्स ऊपर कारोबार कर रहा था। हालांकि, विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (foreign portfolio investors) (FPIs) द्वारा लगातार बाजार से पैसे निकालने से रुपये पर दबाव पड़ रहा है। इस बीच, ग्लोबल तेल बाज़ारों (global oil markets) से कुछ राहत मिली है; US के $104.96$ डॉलर प्रति बैरल पर सेटल होने के सिग्नल के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब $3.39%$ कम हो गईं। इसके बावजूद, मार्च की शुरुआत से अब तक कच्चे तेल की कीमतें लगभग $40%$ तक तेज़ी से बढ़ चुकी हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर (which has weakened the Indian economy) टूट गई है।
रुपये का $93$ का लेवल पार करना भारतीय अर्थव्यवस्था (indian economy) के लिए एक बड़ा रेड सिग्नल है, क्योंकि इससे कच्चे तेल (because crude oil) , इलेक्ट्रॉनिक्स (electronics) और दूसरे ज़रूरी सामानों का इंपोर्ट काफी महंगा (Import of goods is very expensive) हो जाएगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर डॉलर $93.00$ के लेवल से ऊपर बना रहता है, तो आने वाले दिनों में यह $9.40$ तक जा सकता है। इससे घरेलू बाज़ार में महंगाई बढ़ने का सीधा खतरा (Direct threat of rising inflation) है, जिसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। RBI (RBI) का रोल अब और भी ज़रूरी हो गया है, क्योंकि सेंट्रल बैंक द्वारा डॉलर की बिक्री (Because the sale of dollars by the Central Bank) के ज़रिए दखल से बाज़ार को स्थिर (Stabilize the market through intervention) करने की उम्मीद है।





