भारत के करीब पहुंची जंग की आग, मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईरान ने हिंद महासागर में स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के सैन्य बेस ‘डिएगो गार्सिया’ पर दो मिसाइलें दागीं, जो नाकाम रहीं।
मिडिल ईस्ट (middle east) में बढ़ते तनाव (Tension) के बीच, ईरान ने हिंद महासागर में एक स्ट्रेटेजिक (a strategic position in the Indian Ocean) US-ब्रिटिश मिलिट्री बेस डिएगो गार्सिया को टारगेट (Military base Diego Garcia targeted) करने की कोशिश की, लेकिन हमला फेल 9attack failed) हो गया। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें (Intermediate-range ballistic missiles) दागीं, लेकिन दोनों अपने टारगेट से चूक (miss target) गईं।
US अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि एक मिसाइल उड़ान (a missile flight) के दौरान फेल हो गई, जबकि US वॉरशिप ने दूसरे को इंटरसेप्ट करने के लिए SM-3 इंटरसेप्टर मिसाइल लॉन्च (Interceptor missile launch) की। हालांकि यह साफ नहीं है कि इंटरसेप्शन (interception) पूरी तरह से सफल रहा या नहीं, लेकिन डिएगो गार्सिया बेस को किसी भी तरह का नुकसान (Loss) नहीं हुआ। हालांकि, ईरान की मिसाइल कैपेबिलिटी (Iran’s missile capability) और ईरान से इस बेस की दूरी को देखते हुए, माना जा रहा है कि हमला सफल नहीं हुआ।
डिएगो गार्सिया कहां है?
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर (Diego Garcia Indian Ocean) में मौजूद एक बहुत ही स्ट्रेटेजिक मिलिट्री बेस (Strategic Military Base) है। यह भारत से करीब 1800 km दूर है, लेकिन हिंद महासागर में भारत और डिएगो गार्सिया (diego garcia) के बीच ज़्यादा कुछ नहीं आता। इसीलिए इसे भारत का पड़ोस माना जाता है। यहीं से US और UK पूरे एशिया और पश्चिम एशिया में अपने मिलिट्री ऑपरेशन (military operation) करते हैं।
ईरान ने ब्रिटेन को चेतावनी दी थी
इस हमले से पहले, ब्रिटेन ने US को अपने मिलिट्री बेस इस्तेमाल (military base use) करने की इजाज़त दी थी। 20 मार्च 2026 को, ब्रिटिश सरकार (British Government) ने फ़ैसला किया कि अमेरिका, ईरानी मिसाइल साइट्स पर हमला (Attack on Iranian missile sites) करने के लिए ब्रिटिश बेस का इस्तेमाल (use of British base) कर सकता है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना (Ships targeted in the Strait of Hormuz) बनाने वालों पर। हालांकि, इस फ़ैसले के तुरंत बाद ईरान ने चेतावनी (Iran warned) जारी कर दी थी।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा था कि अगर ब्रिटेन ने US को अपने मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने की इजाज़त (Permission to use the base) दी, तो यह ब्रिटिश नागरिकों की जान को खतरे में डालने जैसा (Like endangering the lives of British citizens) होगा। यह स्थिति इस बात को भी दिखाती है कि ईरान सिर्फ़ बयानबाज़ी नहीं करता, बल्कि अपनी चेतावनियों पर अमल (Follow your warnings) भी करता है।





