Mauganj MP:नगर परिषद कार्यालय से 200 मीटर दूर वार्ड क्रमांक 03 का बिटनरी परिसर फिर हुआ जलमग्न, नगर परिषद हुआ फेल, जिम्मेदारो की आंखों मे छाया मोतियाबिंद।
स्कूली बच्चों से लेकर वार्डवासियों तक पर संकट, वर्षों से चली आ रही समस्या पर बडी बडी डीगे फेकने वाले जिम्मेदारों की चुप्पी सवालों के घेरे में❓
मऊगंज ।बरसात का मौसम आते ही नगर परिषद मऊगंज के वार्ड क्रमांक 03 स्थित बिटनरी परिसर की तस्वीर एक बार फिर बदहाल हो गई है। बीते वर्षों की तरह इस वर्ष भी पूरा इलाका जलमग्न हो गया है, जिससे स्थानीय रहवासियों के साथ-साथ स्कूल आने-जाने वाले बच्चों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि यह समस्या कोई नई नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी है, जिसके बारे में नगर परिषद, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को लगातार अवगत कराया जाता रहा है, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद कार्यालय से महज लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थित यह क्षेत्र हर वर्ष बरसात में जलभराव की चपेट में आ जाता है, जिससे आवागमन बाधित हो जाता है। घरों के आसपास गंदा पानी भरने से न केवल दैनिक जीवन प्रभावित होता है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है, जिन्हें जलभराव के बीच होकर मजबूरी में आना-जाना पड़ता है।
वार्डवासियों का आरोप है कि यह समस्या विधायक आवास के सामने की है, इसलिए क्षेत्रीय विधायक **** को इसकी जानकारी भलीभांति है। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बरसात में यही हालात बनते हैं, लेकिन समस्या के स्थायी निराकरण के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की गई। ऐसे में यह सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है कि जब समस्या जनप्रतिनिधियों की जानकारी में है, तब भी समाधान क्यों नहीं हो रहा?
इसी तरह नगर परिषद अध्यक्ष की कार्यशैली पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद अध्यक्ष को एक जागरूक और सक्रिय जनप्रतिनिधि माना जाता है। वे अधिवक्ता भी हैं, इसलिए लोगों को उनसे अपेक्षा थी कि वे इस लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान के लिए गंभीरता से कदम उठाएंगे, लेकिन अब तक धरातल पर कोई ठोस परिणाम दिखाई नहीं दिया। बरसात शुरू होने से पहले वार्डवासियों ने कई बार आवेदन देकर ध्यानाकर्षण कराया, लेकिन न तो नाली व्यवस्था सुधरी, न जल निकासी का कोई प्रभावी इंतजाम हुआ और न ही प्रशासनिक स्तर पर स्थायी समाधान की दिशा में काम होता दिखा।
स्थिति यह है कि अब वार्डवासी नगर परिषद अध्यक्ष, विधायक और प्रशासनिक अमले से निराश होकर जिला कलेक्टर से गुहार लगाने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि यदि नगर परिषद, जनप्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन मिलकर भी वार्ड क्रमांक 03 के इस गंभीर जलभराव संकट का समाधान नहीं कर पा रहे, तो आखिर आम जनता अपनी समस्या लेकर जाए तो जाए कहां?
यह मामला सिर्फ एक वार्ड में जलभराव का नहीं, बल्कि स्थानीय निकाय की कार्यप्रणाली, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा भी है। नगर परिषद कार्यालय के नजदीक स्थित क्षेत्र का यह हाल बताता है कि यदि मुख्य आबादी वाले हिस्से की भी सुध नहीं ली जा रही, तो दूरदराज के वार्डों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। अब जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि आश्वासनों से आगे बढ़कर तत्काल स्थायी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि हर वर्ष बरसात में वार्डवासियों को इसी त्रासदी से न गुजरना पड़े।





