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Rewa MP:अल्ट्राटेक बेला की लेबर कॉलोनी में मजदूर परिवारों पर कार्रवाई का आरोप, महिलाओं से मारपीट और कमरे खाली कराने का मामला गरमाया!

By: संवाददाता । विराट वसुंधरा

On: Tuesday, September 22, 2026 6:55 AM

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🕒 Updated: 22 Sep 2026, 07:15 AM

Rewa MP:अल्ट्राटेक बेला की लेबर कॉलोनी में मजदूर परिवारों पर कार्रवाई का आरोप, महिलाओं से मारपीट और कमरे खाली कराने का मामला गरमाया!

 

 

 

रीवा। रीवा जिले के अल्ट्राटेक बेला प्लांट की लेबर कॉलोनी से एक गंभीर मामला सामने आने का दावा किया जा रहा है। मजदूरों का आरोप है कि प्लांट प्रबंधन के बाउंसरों को लेकर राहुल सिंह राजेश मिश्रा एवं आशीष तिवारी ने मजदूर परिवारों के कमरों को खाली कराने की कार्रवाई की गई। इस दौरान महिलाओं के साथ कथित तौर पर मारपीट और अभद्रता किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। रात में सैकड़ो मजदूरों ने चोरहटा थाना में जाकर शिकायत दर्ज कराया महिलाओं का आरोप है कि राहुल सिंह के द्वारा मारपीट और कपड़े भी फाड़े गए है।

 

 

 

मजदूरों के अनुसार, कुछ कर्मचारियों की लोडिंग-अनलोडिंग से संबंधित ड्यूटी बंद कर दी गई थी, जिसके बाद मामला श्रम न्यायालय तक पहुंचा। मजदूर पक्ष का कहना है कि प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है और फैसला आने तक वर्तमान स्थिति बनाए रखने का आदेश भी दिया गया था। इसके बावजूद मजदूर परिवारों को लेबर कॉलोनी से हटाने की कार्रवाई किए जाने का आरोप है।

मजदूरों का कहना है कि इन परिवारों के छोटे-छोटे बच्चे आसपास के स्कूलों में पढ़ते हैं और परिवार लंबे समय से इसी कॉलोनी में रह रहे हैं। ऐसे में अचानक शाम 6:00 बजे जब केवल महिलाएं थी कमरा खाली कराने की कार्रवाई से परिवारों के सामने रहने और बच्चों की पढ़ाई का संकट खड़ा हो गया है।

मजदूर पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं और बच्चों के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पूरे मामले को और गंभीर बना देता है।

 

 

 

सरकार और प्रशासन से मजदूरों की मांग

मजदूर परिवारों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उनकी मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए, महिलाओं और बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार की जांच हो तथा यदि किसी न्यायालयीन आदेश का उल्लंघन हुआ है तो उसकी भी जांच की जाए।

मजदूरों का कहना है कि उद्योगों में रोजगार और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ उनके परिवारों की सुरक्षा भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका सवाल है कि यदि मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो अंतिम निर्णय आने तक मजदूर परिवारों के साथ इस प्रकार की कार्रवाई क्यों की जा रही है।

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