Rewa MP:आम रास्ते में दबंगों का कब्जा पीड़ित परिवारों ने शासन से मांगी सामूहिक आत्मदाह की अनुमति!
रीवा – जिले की सिरमौर तहसील के लालगांव के ग्राम बेलवा बड़गैयाँ निवासी विजय शंकर द्विवेदी और आशीष कुमार द्विवेदी सहित लगभग 50 की संख्या में द्विवेदी परिवार के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मुख्य मार्ग से उनके घर तक पहुंचने वाला लगभग 100 मीटर लंबा रास्ता, जो राजस्व अभिलेखों और पुराने बंटवारे के दस्तावेजों में दर्ज है, गांव के सरहंग द्वारा कथित रूप से अवरुद्ध कर दिया गया है। रास्ता बंद होने के कारण द्विवेदी परिवार का मुख्य सड़क से संपर्क टूट गया है। पीड़ितों का कहना है कि यह कोई नया अथवा अस्थायी रास्ता नहीं, बल्कि लंबे समय से उपयोग में आने वाला दर्ज मार्ग है।
दर्ज रास्ते पर कब्जे का आरोप
विजय शंकर द्विवेदी व आशीष कुमार द्विवेदी के परिवार ने गांव के ही शिवशंकर त्रिपाठी, कैलाश त्रिपाठी, सरोज त्रिपाठी, अमिता त्रिपाठी और राजू त्रिपाठी पर रास्ते पर कथित अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि रास्ते पर अवरोध खड़ा किए जाने के बाद उनके लिए घर से मुख्य मार्ग तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। पीड़ित पक्ष के अनुसार, रास्ते से संबंधित पुराने बंटवारे के अभिलेख और राजस्व रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिनमें उक्त मार्ग का उल्लेख होने का दावा किया जा रहा है।
करीब 50 सदस्यों का परिवार आवागमन को लेकर परेशान
पीड़ित परिवार के अनुसार, रास्ता बंद होने से केवल विजय शंकर द्विवेदी ही नहीं, बल्कि परिवार के लगभग 50 सदस्य प्रभावित हो रहे हैं। कई महीनों से आवागमन की समस्या बनी होने का दावा करते हुए परिवार ने कहा कि घर से बाहर निकलने, आवश्यक सामान लाने और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भारी परेशानी हो रही है।
परिवार का आरोप है कि रास्ता अवरुद्ध होने के कारण बिजली कनेक्शन और पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि घर तक बिजली की लाइन पहुंचाने तथा पानी की समुचित व्यवस्था बनाए रखने में कठिनाई आ रही है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे मामले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं
विजय शंकर द्विवेदी का आरोप है कि रास्ते के विवाद को लेकर गठित पटवारी जांच में एकरूपता नहीं रही। उनके अनुसार, पहली जांच रिपोर्ट में जो स्थिति दर्शाई गई थी, बाद की रिपोर्टों में उसमें कथित रूप से बदलाव कर दिया गया।
पीड़ित परिवार का दावा है कि जांच की दूसरी और तीसरी रिपोर्ट में पहले के निष्कर्षों से अलग स्थिति प्रस्तुत की गई। परिवार ने आरोप लगाया कि बार-बार बदलती जांच रिपोर्टों के कारण उन्हें न्याय मिलने के बजाय समस्या और जटिल होती जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए सभी जांच रिपोर्टों, उनके तैयार होने की तिथियों और संबंधित अधिकारियों के आदेशों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
पटवारी से लेकर तहसीलदार तक की भूमिका पर सवाल
पीड़ित परिवार ने सिरमौर तहसील के राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि मामले में पटवारी स्तर से लेकर तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर तक की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं रही। उनका कहना है कि यदि राजस्व अभिलेखों में रास्ता दर्ज है, तो उसके वास्तविक स्वरूप का मौके पर परीक्षण कराकर स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए था।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों द्वारा उनकी शिकायतों और दस्तावेजों पर समुचित ध्यान नहीं दिया गया। पीड़ितों के अनुसार, पूरे मामले में राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है। हालांकि, किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की संलिप्तता या भ्रष्टाचार की पुष्टि अभी जांच का विषय है।
तालाब और बांध से होकर वैकल्पिक रास्ते का प्रस्ताव, परिवार ने बताया अव्यावहारिक
विजय शंकर द्विवेदी का आरोप है कि नायब तहसीलदार सिरमौर की ओर से उन्हें पुराने दर्ज रास्ते के स्थान पर एक वैकल्पिक मार्ग का सुझाव दिया गया है। परिवार का कहना है कि प्रस्तावित रास्ता तालाब और बांध से होकर गुजरता है, जो भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उनके लिए सुरक्षित और व्यावहारिक नहीं है।
पीड़ित पक्ष का स्पष्ट कहना है कि यदि वैकल्पिक रास्ता वास्तव में तालाब अथवा बांध के क्षेत्र से होकर गुजरता है, तो वहां से नियमित आवागमन करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। परिवार का दावा है कि उन्हें अपने पुराने और अभिलेखों में दर्ज मार्ग पर ही आवागमन का अधिकार मिलना चाहिए। इस संबंध में प्रशासन को मौके का निरीक्षण कर रास्ते की वास्तविक स्थिति, सुरक्षा और वैधानिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
राजस्व अभिलेखों की जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग
पीड़ित परिवार ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। परिवार के अनुसार, जांच किसी एक कर्मचारी या अधिकारी तक सीमित न रखकर संबंधित पटवारी, राजस्व निरीक्षक, नायब तहसीलदार और तहसीलदार स्तर पर की गई कार्रवाई की भी समीक्षा होनी चाहिए।
परिवार ने पुराने बंटवारे के दस्तावेजों, खसरा, नक्शा, राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कराकर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि 100 मीटर का रास्ता किस स्थिति में दर्ज है और वर्तमान में उस पर किस प्रकार का अवरोध है। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक अथवा अभिलेखों में दर्ज रास्ते पर अवैध कब्जा किया गया है, तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।
सामूहिक आत्मदाह की अनुमति मांगने की बात से प्रशासन में चिंता
पीड़ित परिवार का कहना है कि लंबे समय से रास्ता बंद होने और शिकायतों का समाधान नहीं होने के कारण वे मानसिक एवं सामाजिक रूप से अत्यंत परेशान हैं। परिवार ने शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए यह तक कहा है कि यदि उन्हें आवागमन का रास्ता नहीं दिया गया, तो वे सामूहिक आत्मदाह की अनुमति मांगने जैसी स्थिति में पहुंच गए हैं।
यह कथन मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
हालांकि, आत्मदाह किसी समस्या का समाधान नहीं है और ऐसी स्थिति में प्रशासन को तत्काल परिवार से संपर्क कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। पीड़ित परिवार की शिकायत का समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान किया जाना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
बेलवा बड़गैयाँ के इस मामले में अब पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। परिवार चाहता है कि मौके पर स्वतंत्र टीम भेजकर रास्ते की नाप-जोख कराई जाए, राजस्व अभिलेखों और पुराने बंटवारे के दस्तावेजों का परीक्षण किया जाए तथा जांच रिपोर्टों में कथित बदलाव की भी समीक्षा हो।
परिवार का कहना है कि जब तक विवादित रास्ते का निष्पक्ष निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उनके आवागमन के लिए सुरक्षित और व्यावहारिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को बहाल कराने की दिशा में भी प्रशासन तत्काल कदम उठाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कब तक कार्रवाई करता है और क्या पीड़ित परिवार को उसके कथित दर्ज रास्ते का अधिकार मिल पाता है।





