Bhopal MP:मध्यप्रदेश सरकार खरीदेगी करीब 350 करोड़ का बिजनेस जेट, CM और राज्यपाल करेंगे इस्तेमाल!
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार एक नए बिजनेस जेट विमान की खरीद की तैयारी में है। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार कनाडा निर्मित बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 विमान खरीद रही है। विमान का उपयोग मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य वीआईपी यात्राओं के लिए किया जाएगा। इस खरीद की कुल लागत टैक्स, परिवहन और अन्य खर्चों को शामिल करने के बाद करीब 350 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आ रही है।
सरकार की ओर से विमान खरीदने के पीछे मुख्य तर्क यह बताया जा रहा है कि लगातार विमान और हेलिकॉप्टर किराए पर लेने की तुलना में अपना विमान होने से लंबे समय में सरकारी खर्च कम किया जा सकेगा।
पांच साल में किराए पर खर्च हुए करीब 290 करोड़
विधानसभा में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने विमान और हेलिकॉप्टर किराए पर लेने में करीब 290 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकार के पास नियमित वीआईपी उपयोग के लिए फिलहाल अपना चालू विमान नहीं होने के कारण अलग-अलग मौकों पर विमान और हेलिकॉप्टर किराए पर लेने पड़ते हैं।
इसी खर्च को आधार बनाकर सरकार की ओर से अपने विमान की जरूरत बताई जा रही है। हालांकि, करीब 350 करोड़ रुपये की खरीद के साथ विमान के संचालन, पायलट, तकनीकी रखरखाव, बीमा और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
2024 में मिली थी खरीद की मंजूरी
जानकारी के मुताबिक चैलेंजर-3500 विमान की खरीद को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने वर्ष 2024 में मंजूरी दी थी। उस समय विमान की कीमत करीब 233 करोड़ रुपये बताई गई थी। बाद में टैक्स, परिवहन और अन्य संबंधित खर्चों को जोड़ने के बाद पूरी डील की लागत करीब 350 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है।
यानी प्रारंभिक कीमत और मौजूदा अनुमानित लागत के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। ऐसे में खरीद प्रक्रिया में विमान की मूल कीमत के साथ-साथ टैक्स, डिलीवरी, परिवहन, संचालन और रखरखाव सहित कुल जीवनचक्र लागत कितनी होगी, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।
गुजरात मॉडल का दिया जा रहा हवाला
सरकार की ओर से इस तरह की खरीद के पक्ष में गुजरात मॉडल का हवाला दिए जाने की भी बात सामने आई है। तर्क यह है कि लगातार चार्टर विमान और हेलिकॉप्टर किराए पर लेने के बजाय सरकारी स्वामित्व वाला विमान होने से लंबे समय में वीआईपी यात्राओं का खर्च नियंत्रित किया जा सकता है।
हालांकि, करीब 350 करोड़ रुपये की इस प्रस्तावित खरीद को लेकर यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि विमान की खरीद के बाद उसके संचालन और रखरखाव पर हर वर्ष कितना अतिरिक्त खर्च आएगा और कितने वर्षों में खरीद की लागत की भरपाई किराए की बचत से हो सकेगी।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश सरकार का तर्क जहां किराए के विमान पर लगातार होने वाले खर्च को कम करने का है, वहीं करीब 350 करोड़ रुपये की इस खरीद ने सरकारी खर्च और वीआईपी सुविधाओं को लेकर बहस को भी तेज कर दिया है। अंतिम लागत और खरीद की शर्तों को लेकर आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।




