Rewa प्रभारी DPM राघवेंद्र मिश्रा, जिला औषधि स्टोर, आउटसोर्स व्यवस्था और अवैध पदस्थापन को लेकर हुई शिकायत।
रीवा स्वास्थ्य विभाग की शिकायतें पहुंची भोपाल में मिशन संचालक आयुक्त से हाईकोर्ट तक।
विराट वसुंधरा
रीवा। स्वास्थ्य विभाग में कथित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर की गई शिकायतें अब जिला स्तर से आगे बढ़कर भोपाल स्थित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और हाईकोर्ट तक पहुंच गई हैं। शिकायतकर्ता समाजसेवी एवं पत्रकार अशोक मिश्रा ने एनएचएम मिशन संचालक तथा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष विभिन्न मामलों की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में जिला औषधि स्टोर में कथित दवा खरीदी अनियमितता, आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था, निविदा प्रक्रिया, वेतन कटौती, EPF-ESI तथा अन्य प्रशासनिक मामलों को उठाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इनमें से कुछ मामलों को पहले जिला एवं संभाग स्तर पर भी अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण मामला उच्च स्तर तक पहुंचा है।
जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई का इंतजार।
जिला दवा भंडार से जुड़े मामले में क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, रीवा की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, रिपोर्ट सामने आने के बावजूद लंबे समय तक कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। हालांकि, इन आरोपों और जांच निष्कर्षों की अंतिम पुष्टि सक्षम स्तर की कार्रवाई एवं स्वतंत्र जांच से ही होगी।
DPM प्रभार और पुराने वित्तीय मामले पर भी सवाल।
शिकायत में संविदा DCM राघवेंद्र मिश्रा से संबंधित वर्ष 2016 की करीब ₹6.36 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता का उल्लेख करते हुए उनकी वर्तमान भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। इसके साथ ही संविदा DCM को लगातार DPM का प्रभार दिए जाने तथा उससे जुड़े प्रशासनिक निर्णयों की भी समीक्षा की मांग उठाई गई है। रीवा-मऊगंज क्षेत्र में 200 से अधिक चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी एवं पदस्थापना से संबंधित शिकायतों को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है।
अब कार्रवाई पर टिकी नजर।
शिकायतकर्ता अशोक मिश्रा के मुताबिक, उन्होंने संबंधित मामलों के दस्तावेज वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपे हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित करने वाले मामलों के निराकरण का भरोसा दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि भोपाल मुख्यालय इन शिकायतों पर क्या कदम उठाता है और जांच के बाद किन मामलों में जिम्मेदारी तय होती है। शिकायतों में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता निष्पक्ष जांच और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




