Rewa MP:अशाति एवं कैंसर पैदा करने वाला,न्यूक्लियर प्लान्ट निरस्त होना चाहियेः डा. विनोद शुक्ला
रीवा। जब दुनियां के कई विकसित देखों में परमाणु उर्जा विद्युत संयंत्रों को पर्यावरण, प्राणियों एवं नागरिकों के लिये खतरा होने के कारण बंद किया जा रहा है, तब इस देश में और खासकर मध्यप्रदेश में न्यूक्लियर पावर प्लान्टों की बाढ़ आ रही है। जहां रीवा सहित प्रदेश के कई जिलों में ऐसे न्यूक्लियर पावर प्लान्टों के लिये स्थापना की स्वीकृति देकर प्रदेश व राज्य की सरकारों ने इस प्रदेश की जनता के सामने जीवन और मौत का संकट पैदा कर दिया है। खासतौर पर रीवा एवं विध्य क्षेत्र के सिरमौर क्षेत्र में स्थापित होने जा रहे टाटा कंपनी के न्यूक्लियर पावर प्लान्ट ने इस क्षेत्र की जनता एवं पर्यावरण के लिये बड़ा धर्मसंकट पैदा कर दिया है जिसका अब विरोध हो रहा है। बावजूद इसके गूंगी बहरी एवं जनविरोधी केन्द्र व राज्य की डबल इंजन सरकारें सुनने को तैयार नही हैं। कांग्रेस पार्टी ने भी अब लोकहित को देखते हुये विरोध का झण्डा गाड़ दिया है जो अनिश्चितकालीन धरने के रूप में शुरू हो चुका है। इस तरह प्लान्ट न केवल रोड़झौंही और उसके आसपास के कुछ गांवों के लिये खतरा है अपितु समूचे विंध्य एवं उत्तरप्रदेश तक इसके रेडियेशन का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिये इस तरह का जानलेवा प्रोजेक्ट यहां स्थापित नही होना चाहिये। सभी को दलगत भावना से उठकर इसका पुरजोर विरोध करना चाहिये।चूंकि ये मामला राजनैतिक नहीं बल्कि लाखों करोड़ों जनभावनाओं को आघात पहुंचने वाले विषय से जुड़ा हुआ मद्दा है। इस तरह के विचार देवतालाब विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पीसीसी सदस्य डा. विनोद शुक्ला ने व्यक्त किये हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इतिहास में हुई इसी तरह की गलतियों का प्रमाण भोपाल गैस काण्ड से लिया जाना चाहिये। उसे भी विकास एवं रोजगार से जोड़कर ही स्थापित किया गया था। किन्तु आज भी जब वहां के कचरे को पीथमपुर में जलाने का निर्णय लिया गया तो उसका पुरजोर विरोध हुआ। उसी तरह से न्यूक्लियर पावर प्लान्ट में भी न्यूक्लियर कचरा एकत्र होगा जिसे कहां नष्ट किया जायेगा और उसका क्या दुष्प्रभाव होगा इसे समझा जाना चाहिये। इसके अलावा भी दुनियां में जहां भी ऐसे प्लान्टों से न्यूक्लियर का रिसाव हुआ है वहां लाशों के ढेर बन गये, पर्यावरण एवं पशु पक्षियों की मौतें हुई। इस तरह की घटनाओं से सरकारों को सबक लेना चाहिये। एक आबादी वाले क्षेत्र में, एक पर्यावरण एवं हरियाली से अच्छादित शांतिप्रिय क्षेत्र को, एक शांतिप्रिय प्रदेश को इस तरह के प्रोजेक्ट्स के माध्यम से आशाति एवं मरघट जैसा बनाया जाना ठीक नहीं है। डा. शुक्ल ने कहा कि इस मामले में भी वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है कि यदि प्लान्ट सुरक्षित रूप से भी संचालित होता है तो उस क्षेत्र के एक बड़े दायरे में रेडियेशन के खतरों से इंकार नहीं किया जा सकता। जिसके चलते कैंसर, थायराईड कैस, ब्लड कैंसर आदि कई घातक बीमारियों के लोग शिकार होंगे। जबकि यहां की सरकारी अस्पतालों में जब सामान्य मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा है तब ऐसे गंभीर बीमारियों का कैसे संभव हो सकता है। श्री शुक्ला ने प्रोजेक्ट के पक्ष में बातें करने वाले तथाकथित भजपाईयों को भी आईना दिखाया है कि इस मामले में वे जनता को भ्रमित न करें बल्कि तथ्यात्मक और वैज्ञानिक पहलुओं के आधार पर विचार करें और वयानबाजी करें। क्योकि वे और उनके कई परिजन भी इसी जिले के हैं, वे भी प्रभावित हो सकते हैं। क्योंकि रेडियेशन का खतना किसी वीआईपी या भाजपाई या संधी या सत्ताधारी मानकर छूट देने वाला नहीं हैद्ध। उसके दायरे में जो भी आयेगा वह काल के गाल में समा सकता है। इसलिये एक बार फिर पुरजोर तरीके से मांग की गई है कि यहां किसी भी सूरत मे न्यूक्लियर पावर प्लान्ट की स्थापना नही होनी चाहिये। यहां तक कि समूचे प्रदेश में जहां भी इस तरह के प्लान्ट स्वीकृत किये जा रहे हैं वहां भी ऐसे प्लान्ट निरस्त होना चहिये। साथ ही इस मामले में प्रदेशव्यापी विरोध शुरू किया जाना चाहिये।
डा. विनोद शुक्ला
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पीसीसी सदस्य
देवतालाब विधानसभा क्षेत्र
जिला मऊगंज (म.प्र.)





