Mauganj MP:रीवा-मऊगंज में पंचायत टैक्स पर ग्रामीणों का सवाल—सुविधा शून्य तो टैक्स किस बात का?
शौचालय, नाली, सफाई और सोलर लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव; ग्रामीण बोले—“जब सुविधाएं नहीं तो टैक्स किस बात का?”
रीवा-मऊगंज। ग्राम पंचायतों में टैक्स वसूली की व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी के स्वर तेज होने लगे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय समाजसेवियों का सवाल है कि जब गांवों में आज भी कई बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं, तो पंचायत स्तर पर टैक्स वसूली आखिर किस आधार पर की जा रही है?
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विकास और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं होने, नालियों की समुचित व्यवस्था के अभाव, नियमित सफाई नहीं होने और सोलर लाइट जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में टैक्स का बोझ ग्रामीण परिवारों पर डालने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
“सुविधा शून्य, टैक्स पूरा—आखिर हमारा गुनाह क्या है?”
गरीब और मध्यमवर्गीय ग्रामीण परिवारों का कहना है कि वे पहले से ही सीमित संसाधनों में अपना जीवन चला रहे हैं। यदि पंचायत उनसे विभिन्न प्रकार के कर अथवा शुल्क वसूल करती है, तो उसके बदले कम से कम बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध होना भी जरूरी है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि गांव की गलियों में नियमित सफाई नहीं होती, नालियों की उचित व्यवस्था नहीं है, सार्वजनिक शौचालय की सुविधा नहीं है और प्रकाश व्यवस्था भी कई जगह पर्याप्त नहीं है, तो फिर टैक्स वसूली का औचित्य क्या है?
उनका कहना है कि “हम टैक्स देने से नहीं भाग रहे, लेकिन यह भी जानना चाहते हैं कि टैक्स के बदले हमें कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?”
पंचायत भवनों की स्थिति पर भी सवाल
स्थानीय वरिष्ठ समाजसेवियों ने पंचायतों की कार्यप्रणाली और पंचायत भवनों की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई पंचायत भवनों और कार्यालयों की हालत ऐसी है कि वहां आम लोगों के लिए पहुंचना और काम कराना भी मुश्किल हो जाता है।
समाजसेवियों का आरोप है कि कार्यालय संचालन, रखरखाव और मेंटेनेंस के नाम पर सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद यदि पंचायत भवनों की स्थिति खराब बनी हुई है, तो इसकी निगरानी और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उनका कहना है कि नगर परिषद क्षेत्र में नागरिकों को सड़क, नाली, सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नगरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद कर वसूली की जाती है। ऐसे में ग्राम पंचायतों में भी कर और सुविधा के बीच स्पष्ट संबंध दिखाई देना चाहिए।
टैक्स से पहले सुविधाओं की गारंटी की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों में टैक्स व्यवस्था लागू करने या उसका विस्तार करने से पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इससे प्राप्त राशि का उपयोग किन कार्यों में होगा और ग्रामीणों को इसके बदले क्या सुविधाएं मिलेंगी।
ग्रामीण चाहते हैं कि पंचायत स्तर पर होने वाली आय और खर्च का पारदर्शी विवरण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि पंचायत में स्वच्छता, नाली, प्रकाश व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालय और पंचायत भवन के रखरखाव पर कितनी राशि खर्च की गई।
जवाबदेही तय करने की मांग
ग्रामीणों और समाजसेवियों ने जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत स्तर के अधिकारियों से पंचायतों की जमीनी स्थिति का निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी पंचायत में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ग्रामीणों से टैक्स वसूली सिर्फ राजस्व जुटाने तक सीमित रहेगी या उसके बदले उन्हें वास्तविक नागरिक सुविधाएं भी मिलेंगी?
फिलहाल ग्रामीणों की मांग साफ है—पहले गांव में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित हों, टैक्स की राशि और उसके उपयोग का हिसाब सार्वजनिक हो और पंचायत स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।
टैक्स व्यवस्था, पंचायतों में सुविधाओं की स्थिति और राशि के उपयोग से संबंधित दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पंचायत एवं जिला/जनपद पंचायत कार्यालय के रिकॉर्ड से की जानी आवश्यक है। ग्रामीणों और समाजसेवियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारियों/पंचायत प्रतिनिधियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।





