---Advertisement---

Rewa MP:तबादले के 6 महीने बाद भी RES में जमे अधिकारी, रिलीव नहीं करने पर उठे सवाल!

Google News
Follow Us
---Advertisement---
🕒 Updated: 29 Oct 2026, 05:54 AM

Rewa MP:तबादले के 6 महीने बाद भी RES में जमे अधिकारी, रिलीव नहीं करने पर उठे सवाल!

 

 

 

सहायक यंत्री नमिता सोनी और उपयंत्री अनितराज सिंह के स्थानांतरण आदेश पर अमल क्यों नहीं? कार्यपालन यंत्री बी.डी. कोरी की भूमिका भी सवालों के घेरे में

रीवा। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) विभाग रीवा में स्थानांतरण आदेश के बावजूद अधिकारियों को रिलीव नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। सहायक यंत्री नमिता सोनी और उपयंत्री अनितराज सिंह के तबादले को लगभग छह माह बीत जाने के बाद भी उनके रीवा में पदस्थ बने रहने को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि शासन स्तर से दोनों अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश कई माह पहले जारी किए गए थे। इसके बावजूद उन्हें अब तक नवीन पदस्थापना के लिए कार्यमुक्त नहीं किया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी संबंधित अधिकारियों को लंबे समय तक रीवा में बनाए रखने की वजह क्या है?

 

 

 

 

छह महीने बाद भी रिलीव नहीं, जिम्मेदारी किसकी?

स्थानांतरण के बाद अधिकारियों को नवीन पदस्थापना पर भेजने की प्रक्रिया संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। लेकिन RES रीवा में कथित तौर पर स्थानांतरण आदेश के बावजूद दोनों अधिकारी लंबे समय से यहीं कार्यरत हैं।

मामले में कार्यपालन यंत्री बी.डी. कोरी की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि यदि स्थानांतरण आदेश प्रभावी है तो संबंधित अधिकारियों को अब तक कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया? क्या इसके पीछे कोई प्रशासनिक कारण है, अथवा विभागीय स्तर पर किसी विशेष अनुमति या आदेश के चलते उन्हें रोका गया है?

 

 

 

 

जिला प्रशासन की निगरानी पर भी उठे सवाल

मामला केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं है। स्थानांतरण आदेश पर लंबे समय तक अमल नहीं होने से जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी और जिला पंचायत सीईओ सृष्टि देशमुख की जानकारी में यह मामला है या नहीं, यह भी स्पष्ट होना बाकी है। यदि मामला प्रशासन के संज्ञान में है तो अब तक शासन के स्थानांतरण आदेश के अनुपालन को लेकर क्या कार्रवाई की गई, इसका जवाब भी सामने आना चाहिए।

 

 

 

 

क्या है स्थानांतरण आदेश की स्थिति?

पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु संबंधित स्थानांतरण आदेश की वास्तविक स्थिति है। क्या आदेश में तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश थे? क्या बाद में किसी सक्षम अधिकारी द्वारा तबादला रोकने या संशोधित करने का आदेश जारी किया गया? यदि ऐसा कोई आदेश नहीं है तो फिर छह महीने बाद भी दोनों अधिकारी रीवा में किस आधार पर पदस्थ हैं?

इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

 

 

 

 

लेन-देन के आरोपों की भी हो जांच

सूत्रों और शिकायतों में अधिकारियों को तबादले के बाद भी रीवा में बनाए रखने के पीछे कथित रूप से लेन-देन अथवा संरक्षण जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों की सत्यता जांच का विषय है।

यदि वास्तव में किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन या पदस्थापना संबंधी अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि दोनों अधिकारियों का रीवा में बने रहना किसी वैध प्रशासनिक आदेश के तहत है तो विभाग को वह आदेश सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

 

 

 

 

शासन के आदेश के पालन की मांग

मामले को लेकर अब यह मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के वरिष्ठ अधिकारी स्थानांतरण आदेश, कार्यमुक्ति की स्थिति और दोनों अधिकारियों की वर्तमान पदस्थापना की जांच करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि छह महीने की देरी के लिए जिम्मेदार कौन है और क्या किसी सक्षम प्राधिकारी से इसकी अनुमति ली गई थी।

फिलहाल, पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि स्थानांतरण आदेश प्रभावी है तो छह महीने बाद भी अधिकारी रीवा में क्यों जमे हुए हैं? जवाब विभागीय जांच और दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही साफ हो सकेगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

October 29, 2026

October 29, 2026

October 29, 2026

October 29, 2026

October 29, 2026

October 29, 2026

Leave a Comment