Mauganj MP:नरसिंहपुर ट्रांसफर के बाद भी हनुमना में जमे अधिकारी! सिरमौर से वेतन भुगतान का आरोप, लोकायुक्त और कलेक्टर के आदेश भी बेअसर?
हनुमना जनपद में प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल, लोकायुक्त ने मांगी थी जांच रिपोर्ट; कलेक्टर के कई पत्रों के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
मऊगंज/हनुमना। मऊगंज जिले की जनपद पंचायत हनुमना एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में दर्ज शिकायत में अधिकारियों की पदस्थापना, स्थानांतरण, वेतन भुगतान और पंचायतों में योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता जैलेंद्र सिंह बन्ना ने विकासखंड समन्वयक आवास श्रीमती प्रतिभा सिंह पटेल और सहायक लेखा अधिकारी वसंतलाल पटेल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, प्रतिभा सिंह पटेल की मूल पदस्थापना रीवा जिले की जनपद पंचायत सिरमौर में होने के बावजूद उनके हनुमना में कार्यरत रहने का आरोप है। शिकायतकर्ता का दावा है कि हनुमना में कार्य करने के दौरान उनका वेतन एवं मानदेय मूल पदस्थापना स्थल सिरमौर से ही आहरित किया जाता रहा।
स्थानांतरण चावरपाठा, नरसिंहपुर… फिर भी हनुमना में क्यों?
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि विकास आयुक्त कार्यालय, मध्य प्रदेश के आदेश के तहत प्रतिभा सिंह पटेल का स्थानांतरण जनपद पंचायत चावरपाठा, जिला नरसिंहपुर किया गया था। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें हनुमना से अब तक कार्यमुक्त नहीं किया गया और वे वहीं कार्य कर रही हैं।
यही बिंदु अब प्रशासनिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है—यदि स्थानांतरण आदेश जारी हो चुका था, तो संबंधित अधिकारी को कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया?
क्या इसके पीछे कोई प्रशासनिक अनुमति थी? यदि थी तो उसका आदेश कहां है? और यदि कोई वैध आदेश नहीं था, तो स्थानांतरण के बावजूद अधिकारी को हनुमना में बनाए रखने की जिम्मेदारी किसकी है?
‘प्राणवी ट्रेडर्स’ और ‘अनिलेश ट्रेडर्स’ को लेकर भी गंभीर आरोप
शिकायत में स्थानीय प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि अधिकारी से कथित रूप से जुड़े ‘प्राणवी ट्रेडर्स’ और ‘अनिलेश ट्रेडर्स’ के माध्यम से कूटरचित बिल तैयार कर सरकारी राशि के भुगतान में अनियमितता की गई।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। यदि जांच में इन दावों की पुष्टि होती है तो मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और भुगतान प्रक्रिया की भी गंभीर जांच का विषय बन सकता है।
सात ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी सवाल
शिकायत में जनपद पंचायत हनुमना की गौरी, पटेहरा, भगदेवा, बरांव, गाड़ा और करकचहा सहित सात ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि कुछ मामलों में आवास निर्माण पूरा हुए बिना ही योजना की राशि जारी किए जाने जैसी अनियमितताएं हुई हैं।
यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित रखने के बजाय मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन के जरिए किए जाने की जरूरत है। आखिर जिन हितग्राहियों के नाम पर राशि जारी हुई, क्या उनके आवास वास्तव में बने हैं? भुगतान से पहले और बाद की तस्वीरें, जियो-टैगिंग, मस्टर/रिकॉर्ड और बैंक भुगतान की जांच क्या हुई?
लोकायुक्त ने 13 जनवरी 2025 को मांगी थी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 13 जनवरी 2025 को मध्य प्रदेश लोकायुक्त कार्यालय, भोपाल ने अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा मऊगंज कलेक्टर को पत्र भेजकर मामले में तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन मांगा था।
इसके बाद शिकायतकर्ता के अनुसार, मऊगंज कलेक्टर की ओर से 23 मार्च, 6 मई और 10 जुलाई 2025 को जिला पंचायत सीईओ को पत्र जारी कर निर्धारित समय में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
लेकिन अब सवाल यह है कि इन पत्रों के बाद जांच कहां पहुंची?
कलेक्टर के पत्रों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
यदि कलेक्टर कार्यालय ने जिला पंचायत सीईओ से जांच रिपोर्ट मांगी थी, तो क्या रिपोर्ट तैयार हुई? यदि तैयार हुई तो उसका निष्कर्ष क्या है? यदि रिपोर्ट अब तक तैयार नहीं हुई, तो जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब क्यों नहीं किया गया?
और सबसे अहम सवाल—
स्थानांतरण आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारी को हनुमना से कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया?
लोकायुक्त कार्यालय से जांच संबंधी पत्राचार के बावजूद मामला लंबे समय तक लंबित क्यों रहा?
‘किसकी शह पर चल रहा है पूरा खेल?’
इस पूरे प्रकरण ने हनुमना जनपद पंचायत की प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकता है। लेकिन यदि लोकायुक्त कार्यालय और जिला प्रशासन के स्तर से जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्रवाई लंबित है, तो जवाबदेही तय करने की जरूरत जरूर बनती है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और जिला पंचायत पर हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कब पूरी होगी और स्थानांतरण आदेश के बावजूद हनुमना में पदस्थ रहने के मामले में वास्तविक स्थिति क्या है।
हनुमना की जनता के लिए बड़ा सवाल यही है—अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने में आखिर देरी क्यों? और अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो कार्रवाई कब होगी?





