---Advertisement---

भारतीय रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 92.52 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ग्लोबल तनाव ने अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी।

Google News
Follow Us
---Advertisement---
🕒 Updated: 09 Mar 2026, 08:32 AM

भारतीय रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 92.52 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ग्लोबल तनाव ने अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी।

NEW DELHI:  सोमवार भारतीय अर्थव्यवस्था (indian economy) के लिए भारी उथल-पुथल वाला दिन था, जिसमें अमेरिकी डॉलर  (us dollar) के मुकाबले रुपया (INR) 92.52 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया। मार्केट एक्सपर्ट्स  (Market Experts) के मुताबिक, इस ऐतिहासिक गिरावट  (historical decline) का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट (Main reason Middle East)  में बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव  (Geopolitical tensions) है, जिससे ग्लोबल तेल सप्लाई (global oil supply) में रुकावट आने का खतरा है। नतीजतन, ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 25 प्रतिशत बढ़कर $116 प्रति बैरल को पार कर गईं। चूंकि भारत अपनी 80 प्रतिशत से ज़्यादा फ्यूल ज़रूरतें इम्पोर्ट (Higher fuel requirements import) करता है, इसलिए डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये पर दबाव चरम पर है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

करेंसी एक्सपर्ट्स (experts) का कहना है कि रुपया शुक्रवार की तुलना में 46 पैसे के बड़े ‘गैप’ के साथ खुला, जो मार्केट में बनी अनिश्चितता  (uncertainty in the market) को दिखाता है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर. के मुताबिक, रुपया अभी काफी कमजोर दिख रहा है और अगर यह 92.30 के लेवल से ऊपर बना रहता है, तो आने वाले दिनों में और भी बड़ी गिरावट की संभावना (possibility of a big decline) है। क्रूड ऑयल के पेमेंट के लिए तेल इंपोर्टर्स (Oil importers for payment of crude oil) और बड़ी कंपनियों की भारी डॉलर खरीद (Big dollar purchases by large companies) ने घरेलू करेंसी के लिए हालात (Situation for the domestic currency) और भी मुश्किल बना दिए हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई का खतरा बढ़ (The threat of inflation increases for the general public)  गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

रुपये की इस बेतहाशा गिरावट को रोकने (prevent a reckless fall)  के लिए अब सभी की निगाहें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) (RBI) पर हैं। मार्केट को उम्मीद है कि सेंट्रल बैंक (Central Bank) इस बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए अपने फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व से डॉलर (Dollars from foreign exchange reserves) बेचकर दखल देगा। हालांकि, एक्सपर्ट्स इसे सिर्फ एक ‘स्पीड ब्रेकर’ (Experts call it just a ‘speed breaker’) मान रहे हैं, क्योंकि ग्लोबल टेंशन कम होने तक रुपये को असली मजबूती मिलना मुश्किल (hard to find strength) लग रहा है। फिलहाल, 91.90-92.00 का लेवल रुपये के लिए एक अहम सपोर्ट माना जा रहा है। अब RBI की एक्टिविटी ही तय करेगी कि रुपया 93 के साइकोलॉजिकल लेवल को छूने (Touching the psychological level) से बच पाता है या नहीं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

March 10, 2026

March 10, 2026

March 10, 2026

March 10, 2026

March 10, 2026

March 10, 2026

Leave a Comment