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इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, कच्चा तेल $119 से फिसलकर $92 पर पहुंचा, क्या अब भारत में पेट्रोल और डीज़ल सस्ता होगा?

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🕒 Updated: 10 Mar 2026, 10:12 AM

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, कच्चा तेल $119 से फिसलकर $92 पर पहुंचा, क्या अब भारत में पेट्रोल और डीज़ल सस्ता होगा?

NEW DELHI:   इंटरनेशनल एनर्जी मार्केट (International Energy Market) में पिछले 24 घंटों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। सोमवार को $119.50 प्रति बैरल के डरावने लेवल पर पहुंचा कच्चा तेल मंगलवार (crude oil tuesday) सुबह गिरकर $92 के करीब आ गया। कीमतों में करीब 6.6% की भारी गिरावट (huge decline) के पीछे अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) का वह बयान माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने इशारा किया था कि वेस्ट एशिया (pointed out that West Asia) में चल रहा युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा। वहीं, रूस के प्रेसिडेंट (President of Russia) पुतिन और ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत ने इन्वेस्टर्स में शांति की उम्मीद जगाई (Investors hope for peace) है, जिससे ऊंची कीमतों पर बिकवाली शुरू (Selling starts at higher prices)  हो गई है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जहां ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (Revolutionary Guards of Iran)  (IRGC) ने तेल एक्सपोर्ट रोकने की धमकी (Threat to stop oil exports) दी है, वहीं मार्केट ने इसे नज़रअंदाज़ किया है। इसकी वजह अमेरिका और G-7 देशों की वह स्ट्रैटेजी (The strategy of countries)  है, जिसके तहत वे अपने ‘इमरजेंसी ऑयल रिजर्व’ से लाखों बैरल तेल मार्केट में उतारने की तैयारी (Preparations to release barrel oil into the market) कर रहे हैं। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन दुनिया भर में सप्लाई (Trump administration supplies worldwide) की कमी से बचने के लिए रूस पर तेल बैन में ढील देने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि, इराक और सऊदी अरब द्वारा प्रोडक्शन (Production by Saudi Arabia) में कटौती का डर (fear of cuts) अभी भी बना हुआ है, जिससे एक्सपर्ट्स (experts) का मानना ​​है कि कीमतें $75 और $105 के बीच ऊपर-नीचे हो सकती हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

भारत (India) अपनी तेल ज़रूरतों (oil needs) का 85% से ज़्यादा इम्पोर्ट करता है, ऐसे में क्रूड का $90 के करीब पहुंचना भारतीय इकॉनमी (Indian economy) के लिए अच्छा संकेत है। अगर कीमतें इसी लेवल पर स्थिर रहती हैं, तो घरेलू तेल कंपनियां (domestic oil companies)  (IOCL, HPCL, BPCL) पेट्रोल (petrol) और डीज़ल की कीमतों (diesel prices) में 2 से 5 रुपये तक की कटौती कर सकती हैं। इससे न केवल आम आदमी की जेब पर बोझ कम होगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट कॉस्ट कम (transport cost reduced) होने से महंगाई पर भी लगाम लगेगी। हालांकि, आखिरी फैसला खाड़ी देशों (final decision gulf countries) की ज़मीनी स्थिति और इंटरनेशनल डिप्लोमेसी (International Diplomacy) के अगले रुख पर निर्भर करेगा।

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