🕒 Updated: 06 Oct 2026, 10:42 AM
Mauganj MP:मऊगंज में पत्रकारों की आवाज पर सवाल: SP से पूछ रहे पत्रकार—खबर लिखना अपराध क्यों?खबर लिखने पर नाराजगी, कार्रवाई की धमकी और कवरेज में रोक के आरोप; पत्रकारों ने SP से मांगा जवाब!
मऊगंज। जिले में पत्रकारिता और पुलिस के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब पत्रकारों की ओर से पुलिस अधीक्षक से सीधे सवाल किए जा रहे हैं। पत्रकारों का कहना है कि जनता की समस्याओं और क्षेत्र की जमीनी हकीकत को सामने लाना यदि पत्रकार का दायित्व है, तो फिर खबर लिखने या कवरेज करने पर नाराजगी क्यों जताई जाती है?
पत्रकारों का आरोप है कि मऊगंज थाना क्षेत्र में पुलिस व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर खबर प्रकाशित किए जाने के बाद कभी केस की धमकी तो कभी जेल भेजने जैसी बातें सामने आती हैं। वहीं, कुछ मामलों में कवरेज के दौरान पत्रकारों को रोकने या प्रतिबंधित करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर पत्रकारों की आवाज दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है?
“हम वही लिखते हैं जो जनता बताती है”
पत्रकारों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार नशे और अवैध शराब की बिक्री को लेकर शिकायतें मिलती हैं। एक तरफ शासन स्तर पर नशामुक्ति अभियान चलाने और नशे के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में कथित रूप से नशे के कारोबार को लेकर सवाल उठते रहते हैं।
पत्रकारों का सवाल है कि यदि गांव-गांव से नशे की बिक्री और शराब को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, तो इन मुद्दों को खबरों में उठाना आखिर गलत कैसे हो सकता है?
नशामुक्ति अभियान के बीच जमीनी हकीकत पर सवाल
केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के बीच मऊगंज में भी नशे के कारोबार को लेकर शिकायतें और चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं। पत्रकारों का कहना है कि केवल अभियान का प्रचार पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसकी वास्तविक प्रभावशीलता जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए।
इसी को लेकर पत्रकारों ने सवाल उठाया है कि यदि गलियों और गांवों में खुलेआम नशे की उपलब्धता की शिकायतें हैं, तो नशामुक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
TI राम सिंह को लेकर भी उठ रहे सवाल
मऊगंज थाना प्रभारी राम सिंह को लेकर पत्रकारों और अन्य लोगों की ओर से समय-समय पर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। पत्रकारों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद थाना प्रभारी के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं देती।
इसी कारण अब पत्रकार पुलिस अधीक्षक से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर शिकायतों के बाद भी थाना प्रभारी को लगातार संरक्षण मिलने की धारणा क्यों बन रही है?
पत्रकारों ने सवालिया अंदाज में यह भी पूछा है कि क्या TI राम सिंह पुलिस अधीक्षक की “अंगूठी का नगीना” बन गए हैं, जो शिकायतों के बाद भी हर बार सुरक्षित नजर आते हैं?
हालांकि, यह पत्रकारों द्वारा उठाया गया सवाल और आरोप है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
SP साहब, पत्रकारों की आवाज सुनिए
पत्रकारों का कहना है कि उन्हें किसी अधिकारी से विशेष सुविधा नहीं चाहिए। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि उन्हें स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से अपना काम करने दिया जाए।
पत्रकारों का कहना है कि—
“खबर लिखना अपराध नहीं है। जनता की आवाज उठाना पत्रकार का दायित्व है। यदि किसी खबर में तथ्य गलत हैं तो उसका खंडन किया जा सकता है, लेकिन खबर लिखने पर धमकी या कार्रवाई का डर दिखाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।”
अब निगाहें मऊगंज पुलिस अधीक्षक पर हैं कि वे पत्रकारों द्वारा उठाए जा रहे इन सवालों का क्या जवाब देते हैं और थाना प्रभारी से जुड़ी शिकायतों तथा पत्रकारों को कथित तौर पर कवरेज से रोकने के आरोपों पर क्या कार्रवाई करते हैं।





