Bhopal MP:पूर्व IAS अधिकारी रमेश थेटे नागपुर से गिरफ्तार, आय से अधिक संपत्ति मामले में भोपाल कोर्ट का वारंट!
भोपाल/नागपुर। मध्य प्रदेश कैडर के 1993 बैच के पूर्व IAS अधिकारी रमेश थेटे को पुलिस ने महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में भोपाल की अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान जज कल्पना कोतवाल की अदालत ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया था।
आय से अधिक संपत्ति मामले में लोकायुक्त की जांच
मामला पूर्व IAS अधिकारी रमेश थेटे और उनकी पत्नी मंदा थेटे के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के प्रकरण से जुड़ा है। लोकायुक्त की जांच के मुताबिक दंपती द्वारा करीब 68 लाख रुपये का बैंक लोन लिया गया था। जांच में यह बात सामने आने का दावा किया गया कि वर्ष 2012-13 के दौरान अपेक्षाकृत कम समय में इस कर्ज का भुगतान कर दिया गया।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने वर्ष 2013 में मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान दोनों के विभिन्न बैंक खातों में हुए लेनदेन की जानकारी जुटाई गई। जांच एजेंसी के अनुसार उनकी घोषित आय और सामने आई संपत्तियों के बीच अंतर पाए जाने के आरोप हैं।
कई बैंक खातों में लेनदेन की जांच
लोकायुक्त की जांच के दौरान रमेश थेटे और उनकी पत्नी के अलग-अलग बैंकों में खातों और उनमें हुए बड़े लेनदेन की जानकारी सामने आई। इसके साथ ही उनकी आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने के आरोपों की भी जांच की गई।
मामले में जांच एजेंसी ने वित्तीय लेनदेन, संपत्ति और बैंकिंग रिकॉर्ड को आधार बनाया। इसी प्रकरण में आगे की न्यायिक कार्रवाई के तहत भोपाल की अदालत ने पूर्व IAS अधिकारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
36 साल के सेवाकाल में कई मुकदमों का जिक्र
रमेश थेटे के प्रशासनिक सेवाकाल को लेकर भी कई मामलों का उल्लेख सामने आता रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनके करीब 36 वर्ष के सेवाकाल में 27 मामलों में उनका नाम दर्ज होने की बात कही गई है। वहीं कुछ रिपोर्टों में उनके खिलाफ कुल 37 मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, अलग-अलग मामलों की प्रकृति और वर्तमान कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए केवल किसी मामले में नाम दर्ज होने को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी अंतिम स्थिति न्यायालय के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब आगे क्या?
नागपुर से गिरफ्तारी के बाद पूर्व IAS अधिकारी रमेश थेटे को संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। लोकायुक्त प्रकरण में अब जांच और न्यायिक कार्रवाई आगे बढ़ेगी। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और उसके निर्णय पर निर्भर करेगी।
गौरतलब है कि आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां अधिकारी की ज्ञात आय, संपत्ति, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन का तुलनात्मक परीक्षण करती हैं। रमेश थेटे के मामले में भी लोकायुक्त की कार्रवाई इसी वित्तीय जांच से जुड़ी बताई जा रही है।





