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US डॉलर की ताकत का राज क्या है? इतिहास, भरोसा और ‘पेट्रो-डॉलर’ का कनेक्शन

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🕒 Updated: 07 Feb 2026, 07:28 AM

US डॉलर की ताकत का राज क्या है? इतिहास, भरोसा और ‘पेट्रो-डॉलर’ का कनेक्शन

Washington/New Delhi:   दूसरे विश्व युद्ध (second world war) के बाद जब दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं चरमरा (World economies collapse) रही थीं, तब अमेरिका ने डॉलर (America dollar) को सोने (Gold) से जोड़कर एक स्थिर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की नींव (Foundations of the international financial system) रखी। आज वैश्विक व्यापार (global trade) का एक बड़ा हिस्सा डॉलर (dollar) में ही होता है, क्योंकि यह दुनिया की सबसे विश्वसनीय मुद्रा (reliable currency) मानी जाती है। डॉलर का यह प्रभुत्व केवल अमेरिका (Dominion only America) की सैन्य या आर्थिक ताकत (economic strength)  का नतीजा नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें वैश्विक बैंकिंग (Roots Global Banking) और निवेश के उस अटूट भरोसे (that unwavering confidence in investment)  में हैं, जिसे ‘सेफ हैवन’ (Safe Haven) कहा जाता है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार (foreign exchange reserves) का सबसे बड़ा हिस्सा डॉलर में रखना ही सुरक्षित (It is safe to keep the share in dollars) समझते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डॉलर की अजेय शक्ति (The unstoppable power of the dollar) का एक मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार (International market) में कच्चे तेल का व्यापार (crude oil trading) है। ‘पेट्रो-डॉलर’ व्यवस्था(The ‘Petro-Dollar’ System)  के तहत, दुनिया के किसी भी देश को तेल खरीदने (buy oil) के लिए डॉलर की आवश्यकता (dollar requirement) पड़ती है, क्योंकि अधिकांश तेल निर्यातक (Majority oil exporters) देश इसी मुद्रा में भुगतान स्वीकार (accept payment in currency) करते हैं। इस व्यवस्था ने डॉलर की वैश्विक मांग (The system created global demand for the dollar.) को निरंतर बनाए रखा है और इसे किसी भी बड़े आर्थिक संकट (major economic crisis) में कमजोर होने से बचाया है। इसके अलावा, अमेरिकी केंद्रीय बैंक ‘फेडरल रिजर्व’ द्वारा ब्याज (Interest from the Federal Reserve) दरों में किया गया मामूली बदलाव भी दुनिया भर के बाजारों और विकासशील देशों की मुद्राओं (Currencies of developing countries) को सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डॉलर की असली ताकत (Strength) वहां का पारदर्शी कानूनी तंत्र (transparent legal system) और दशकों से बनी स्थिरता है। हालांकि, हाल के वर्षों में कई देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार (trading in currencies) करने और डॉलर के विकल्प तलाशने की बात कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल इसके पास कोई मजबूत वैश्विक प्रतिस्पर्धी नहीं है। वैश्विक कर्ज और निवेश का विशाल हिस्सा आज भी डॉलर में ही मौजूद है, जिसे वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से हटाना नामुमकिन सा (It is impossible to remove it from the international system.)  लगता है। जब तक दुनिया का वित्तीय ढांचा डॉलर (Nia’s financial structure dollar) पर आधारित है, तब तक यह ग्लोबल करेंसी (global currency) के रूप में अपना सर्वोच्च स्थान (highest place) बनाए रखेगा।

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