Bhopal MP:भवन निर्माण के नियमों में बड़ा बदलाव: 2152 वर्गफीट तक घर के लिए आसान होगी अनुमति, शुल्क जमा करते ही मिल सकेगी स्वतः स्वीकृति!
भोपाल। मध्यप्रदेश में मकान और भवन निर्माण से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मप्र एकीकृत भूमि विकास एवं भवन प्रोत्साहन नियम-2026 का ड्राफ्ट तैयार किया है। प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद छोटे आवासीय भवनों के निर्माण के लिए लोगों को नगरीय निकायों के चक्कर लगाने की जरूरत काफी कम हो सकती है।
ड्राफ्ट के मुताबिक 2152 वर्गफीट यानी 200 वर्गमीटर तक के आवासीय भवन के लिए स्वघोषणा पत्र और ऑनलाइन शुल्क जमा करने के बाद निर्माण की स्वतः अनुमति मिलने का प्रावधान किया गया है। हालांकि यह सुविधा निर्धारित भवन निर्माण नियमों और शर्तों के पालन पर निर्भर होगी।
छोटे निर्माण कार्यों के लिए भी राहत
प्रस्तावित नियमों में पहले से बने मकानों में किए जाने वाले कई छोटे निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को अनुमति प्रक्रिया से बाहर रखने का प्रावधान है। तय शर्तों के तहत बाउंड्रीवॉल, शेड, दरवाजे-खिड़की में बदलाव, टाइल्स, कमरे में पार्टिशन, पुताई और प्लास्टर जैसे कुल 18 कार्य बिना अलग अनुमति के किए जा सकेंगे।
300 वर्गमीटर तक नक्शा मंजूरी में आर्किटेक्ट की बड़ी भूमिका
ड्राफ्ट में 3229 वर्गफीट यानी 300 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले अधिकृत आर्किटेक्ट को भवन नक्शा मंजूर करने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इससे छोटे प्लॉट पर मकान बनाने वालों के लिए प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल हो सकती है।
वहीं 5381 वर्गफीट यानी 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट के लिए स्वीकृत लेआउट होने की स्थिति में टीएंडसीपी से अलग मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। ऐसे मामलों में नगरीय निकाय से अनुमति लेने का प्रावधान प्रस्तावित है।
हाईराइज भवनों के लिए सड़क और प्लॉट का आकार महत्वपूर्ण
नए ड्राफ्ट में बहुमंजिला भवनों के निर्माण को सड़क की चौड़ाई और प्लॉट के आकार से जोड़ने का प्रस्ताव है। इससे छोटे शहरों में भी निर्धारित मानकों के तहत बहुमंजिला इमारतों के निर्माण का रास्ता खुल सकता है।
15 मंजिल से अधिक या 45 मीटर से ऊंचे भवनों को हाईराइज की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव है। 45 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के लिए साइट क्लियरेंस कमेटी निर्णय लेगी। निगम क्षेत्रों में यह समिति निगमायुक्त की अध्यक्षता में काम करेगी।
बेसमेंट, पार्किंग और बालकनी को लेकर भी प्रावधान
प्रस्तावित नियमों में निर्धारित शर्तों के तहत पार्किंग, बेसमेंट और बालकनी को फ्लोर एरिया रेशियो यानी FAR की गणना से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है। वहीं ग्रीन बिल्डिंग को प्रोत्साहित करने के लिए 3 से 5 प्रतिशत तक अतिरिक्त FAR देने का प्रस्ताव है।
बेस FAR से अधिक निर्माण के लिए 50 प्रतिशत तक प्रीमियम FAR उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा गया है। इसे कलेक्टर गाइडलाइन की 20 प्रतिशत दर पर खरीदने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
12.5 मीटर से ऊंचे भवनों में लिफ्ट अनिवार्य
ड्राफ्ट के अनुसार 12.5 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों में लिफ्ट अनिवार्य होगी। इसके साथ भवन का निकाय में पंजीयन, इंश्योरेंस और हर छह महीने में सुरक्षा ऑडिट का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
वहीं 140 वर्गमीटर से बड़े प्लॉटों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य होगी। आवासीय कमरे का न्यूनतम क्षेत्रफल 9.5 वर्गमीटर और न्यूनतम ऊंचाई 2.6 मीटर रखने का प्रस्ताव है।
कॉलोनी, मैरिज गार्डन और फार्म हाउस के लिए भी नए मानक
प्रस्तावित नियमों में कॉलोनी विकास, मैरिज गार्डन और फार्म हाउस के लिए भी नए मानक तय किए गए हैं।
- आवासीय कॉलोनी: सड़क की चौड़ाई 7.5 से 24 मीटर तक प्रस्तावित।
- औद्योगिक क्षेत्र की कॉलोनी: सड़क की चौड़ाई 12 से 24 मीटर तक।
- मैरिज गार्डन: 5 लाख तक आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 4000 वर्गमीटर और बड़े शहरों में 10,000 वर्गमीटर का प्लॉट।
- फार्म हाउस: न्यूनतम 0.40 हेक्टेयर कृषि भूमि।
- एग्री-टूरिज्म: कम से कम 1 हेक्टेयर भूमि।
- प्लॉट मर्जर: आसपास के दो प्लॉटों को जोड़ने की अनुमति का प्रावधान।
- प्लॉट विभाजन: नए प्लॉट का आकार कम से कम 500 वर्गमीटर होने पर विभाजन मान्य होगा।
अभी ड्राफ्ट, सुझावों के बाद हो सकता है अंतिम रूप
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस ड्राफ्ट को एशियाई विकास बैंक (ADB) के प्रतिनिधियों समेत विभिन्न संस्थाओं को सुझाव के लिए भेजा है। यानी ये प्रावधान फिलहाल प्रस्तावित नियमों का हिस्सा हैं। सुझाव और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
अगर प्रस्तावित नियम लागू होते हैं तो इसका सबसे बड़ा असर छोटे मकान बनाने वाले लोगों, आर्किटेक्ट, कॉलोनाइजर और बहुमंजिला भवन निर्माण से जुड़े लोगों पर पड़ेगा। खास तौर पर 200 वर्गमीटर तक के आवासीय निर्माण में ऑनलाइन स्वघोषणा और शुल्क के आधार पर स्वतः अनुमति की व्यवस्था निर्माण स्वीकृति की प्रक्रिया को काफी सरल बनाने वाली साबित हो सकती है।





