Mauganj MP:पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना को बदनाम करने की साजिश? कथित ऑडियो वायरल होने पर राजेंद्र तिवारी ने उठाए गंभीर सवाल!
श्रद्धा कार्यक्रम के बहाने बातचीत रिकॉर्ड करने का आरोप, मोबाइल से ऑडियो ट्रांसफर किए जाने का दावा; राजू सिंह बेलौही तक ऑडियो पहुंचने को लेकर भी सवाल
मऊगंज। पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता सुखेंद्र सिंह बन्ना से जुड़ी कथित निजी बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मऊगंज की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मामले में राजेंद्र तिवारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उनकी जानकारी और अनुमति के बिना बातचीत की रिकॉर्डिंग को बाहर निकालकर प्रसारित किया गया। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे उन्हें और पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना की राजनीतिक एवं सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है।
श्रद्धा कार्यक्रम के बहाने घर बुलाने का आरोप
राजेंद्र तिवारी के मुताबिक, विनोद मिश्रा खोड़मानी ने उन्हें श्रद्धा कार्यक्रम के बहाने अपने घर बुलाया था। बातचीत के दौरान पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई। तिवारी का आरोप है कि इसी दौरान ऑडियो सुनने के बहाने उनका मोबाइल लिया गया और उसमें मौजूद रिकॉर्डिंग को दूसरे मोबाइल में ट्रांसफर कर लिया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
राजू सिंह बेलौही तक ऑडियो पहुंचने का दावा
राजेंद्र तिवारी का दावा है कि बाद में यही ऑडियो राजू सिंह बेलौही तक पहुंची और इसके बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। तिवारी ने सवाल उठाया है कि जब बातचीत निजी थी और उसे सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं दी गई थी, तो आखिर रिकॉर्डिंग किसके माध्यम से बाहर पहुंची और उसे सोशल मीडिया तक किसने पहुंचाया?
विनोद मिश्रा के कथित दावे से बढ़ा विवाद
मामले में दूसरा पक्ष भी सामने आया है। विनोद मिश्रा की ओर से कथित तौर पर दावा किया गया है कि राजू सिंह बेलौही ने उनके मोबाइल से ऑडियो चोरी से लेकर वायरल की। ऐसे में ऑडियो के स्रोत और उसके प्रसारण को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
यही विरोधाभासी दावे अब पूरे मामले को और पेचीदा बना रहे हैं। सवाल यह है कि रिकॉर्डिंग मूल रूप से किस डिवाइस में थी, उसे किसने दूसरे मोबाइल में ट्रांसफर किया और सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की शुरुआत कहां से हुई?
पुलिस शिकायत के बाद खुल सकता है पूरा राज
राजेंद्र तिवारी ने संकेत दिया है कि मऊगंज लौटने के बाद वह पूरे मामले की शिकायत पुलिस से करेंगे। यदि शिकायत दर्ज होती है तो पुलिस जांच में मोबाइल डिवाइस, रिकॉर्डिंग की मूल फाइल, उसके ट्रांसफर और प्रसारण से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ऑडियो वास्तव में किस परिस्थिति में रिकॉर्ड हुई, वह किन लोगों तक पहुंची और सोशल मीडिया पर वायरल होने के पीछे किसकी भूमिका रही।
राजनीतिक साजिश या निजी बातचीत का विवाद?
कथित ऑडियो वायरल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह महज निजी बातचीत के लीक होने का मामला है या इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद भी है। राजेंद्र तिवारी ने इसे छवि खराब करने की कोशिश बताया है, जबकि दूसरी ओर ऑडियो के बाहर आने को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुलिस जांच और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने आ सकेगी। जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को ऑडियो वायरल करने या चोरी करने का दोषी मानना उचित नहीं होगा।
अब निगाह पुलिस शिकायत और जांच पर है—निजी बातचीत का कथित ऑडियो आखिर किसके मोबाइल से बाहर निकला, किसके जरिए सोशल मीडिया तक पहुंचा और इसके पीछे वास्तविक घटनाक्रम क्या था? मऊगंज की राजनीति में यह सवाल फिलहाल चर्चा के केंद्र में है।





