Mauganj MP:पुश्तैनी जमीन को लेकर विवाद, पीड़ित परिवार ने जनप्रतिनिधियों से लगाई थी न्याय की गुहार!
कथित भाजपा नेता पर जमीन हड़पने की कोशिश के आरोप, प्रदेश अध्यक्ष से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक पहुंचा मामला; पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर जताया आभार
मऊगंज। मऊगंज जिले में जमीन से जुड़े विवाद के बीच एक मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति की पुश्तैनी जमीन को लेकर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि एक कथित भाजपा नेता द्वारा राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाने का प्रयास करते हुए जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, परिवार द्वारा मामले को जनप्रतिनिधियों के समक्ष उठाए जाने के बाद विवाद ने नया मोड़ लिया और पीड़ित पक्ष को राहत मिलने की बात कही जा रही है।
पीड़ित परिवार के मुताबिक, संबंधित जमीन उनकी पुश्तैनी संपत्ति है। आरोप है कि प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा जमीन पर अपना दावा स्थापित करने और कब्जे की कोशिश की जा रही थी। परिवार का कहना है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा अपने राजनीतिक रसूख का हवाला देकर प्रशासनिक स्तर पर भी दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सामने रखी गई थी शिकायत
हाल ही में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के मऊगंज दौरे के दौरान पीड़ित पक्ष ने अपनी समस्या उनके सामने रखी। इसके साथ ही परिवार ने मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल, देवतालाब विधायक एवं मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गिरीश गौतम तथा भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मिश्रा से भी न्याय की गुहार लगाई।
पीड़ित परिवार का कहना है कि जनप्रतिनिधियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक प्रभाव के आधार पर किसी की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
विधायक प्रदीप पटेल ने दिलाया कार्रवाई का भरोसा
परिवार के अनुसार, मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल ने मामले में पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया और स्पष्ट किया कि सरकार में किसी भी व्यक्ति को दबाव या राजनीतिक रसूख के जरिए कमजोर वर्ग की संपत्ति पर कब्जा करने की छूट नहीं दी जाएगी।
इसके बाद पीड़ित पक्ष को राहत मिलने की बात सामने आई है। परिवार ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए विधायक प्रदीप पटेल समेत भाजपा के सभी जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के प्रति आभार जताया है।
जमीन विवाद में निष्पक्ष जांच की मांग
हालांकि, पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट होना अभी महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेख, स्वामित्व दस्तावेज और न्यायालय अथवा प्रशासन के आदेश ही अंतिम स्थिति निर्धारित करते हैं।
पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि प्रभावशाली लोगों के दबाव के बावजूद कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को इसी तरह न्याय मिलता रहा, तो आम लोगों का प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर विश्वास और मजबूत होगा।





