Rewa MP:विंध्य विकास प्राधिकरण में CEO की जॉइनिंग पर विवाद, अध्यक्ष की आपत्ति के बाद मामला गरमाया!
अध्यक्ष डॉ. पंचू लाल प्रजापति ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल, उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह पर बिना सूचना जॉइनिंग कराने का आरोप; CEO का प्रभार अब भी दूसरे अधिकारी के पास
रीवा। विंध्य विकास प्राधिकरण में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) की नियुक्ति और पदभार ग्रहण को लेकर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. पंचू लाल प्रजापति ने आरोप लगाया है कि उन्हें बिना सूचना दिए उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह ने CEO डीपी अहिरवार की जॉइनिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। अध्यक्ष ने इस पूरी प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए इसे नियमों के विपरीत बताया है।
जानकारी के मुताबिक आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, मध्य प्रदेश भोपाल के आदेश के आधार पर जिला योजना अधिकारी, शहडोल डीपी अहिरवार ने 13 अक्टूबर 2026 को विंध्य विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में कार्यालय पहुंचकर पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान अध्यक्ष डॉ. पंचू लाल प्रजापति के कार्यालय में मौजूद होने के बावजूद उन्हें कथित तौर पर इस प्रक्रिया की पूर्व सूचना नहीं दी गई।
अध्यक्ष का कहना है कि प्राधिकरण की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण निर्णयों और पदभार से जुड़ी प्रक्रिया में अध्यक्ष की भूमिका और सहमति की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने CEO की जॉइनिंग की प्रक्रिया को ही नियमसम्मत नहीं माना है और इस संबंध में अपनी आपत्ति संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई है।
जॉइनिंग हुई, लेकिन प्रभार का मामला अब भी अटका
मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि डीपी अहिरवार की जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद उन्हें CEO का वास्तविक प्रभार अभी तक नहीं मिला है। वर्तमान में प्राधिकरण का प्रभार केडी साकेत के पास बताया जा रहा है और वही विभागीय कार्यों का निष्पादन कर रहे हैं।
यानी एक ओर जॉइनिंग को लेकर विवाद है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक प्रभार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। यही वजह है कि CEO की नियुक्ति और प्रभार का मामला अब प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
अध्यक्ष ने नियमों को लेकर उठाए सवाल
अध्यक्ष डॉ. पंचू लाल प्रजापति ने कलेक्टर रीवा से मुलाकात के दौरान अपनी आपत्तियां सामने रखीं। उनका दावा है कि डीपी अहिरवार से संबंधित आदेश जिस नियम के आधार पर किया गया है, वह उचित नहीं है। अध्यक्ष के मुताबिक संबंधित नियमों के तहत प्राधिकरण के CEO के प्रभार के लिए निर्धारित पद अथवा समकक्ष रैंक के अधिकारी की व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए।
अध्यक्ष का आरोप है कि उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह ने अलग व्याख्या के आधार पर कलेक्टर से आदेश जारी करवाया और इसी के बाद डीपी अहिरवार की जॉइनिंग कराई गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से पूरे विवाद पर विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
उपाध्यक्ष पर कलेक्टर को गुमराह करने का आरोप
अध्यक्ष डॉ. पंचू लाल ने उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें विश्वास में लिए बिना पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि कलेक्टर को मामले की पूरी स्थिति बताए बिना आदेश जारी करवाया गया।
हालांकि उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह का पक्ष इस खबर के लिए उपलब्ध नहीं हो सका है। ऐसे में उनके पक्ष और संबंधित प्रशासनिक आदेशों की स्वतंत्र पुष्टि इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
अध्यक्ष ने लगाए गंभीर आरोप, भोपाल तक पहुंचा मामला
विवाद केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है। अध्यक्ष डॉ. पंचू लाल प्रजापति ने उपाध्यक्ष पर उन्हें नीचा दिखाने और अपमानित करने का आरोप लगाया है। अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया जाता है और उन्हें सामाजिक रूप से अपमानित करने का प्रयास किया जाता है।
ये आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। अध्यक्ष के मुताबिक मामले की शिकायत भोपाल स्तर पर भी भेजी गई है।
प्राधिकरण में बढ़ रहा वर्चस्व का विवाद
विंध्य विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच बढ़ता विवाद अब महज पदभार की प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा। दोनों पदों की भूमिका, अधिकार और निर्णय प्रक्रिया को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं।
अध्यक्ष का आरोप है कि उपाध्यक्ष अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उनके अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहे हैं। वहीं पूरे विवाद का समाधान अब संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और भाजपा संगठन के स्तर पर होने वाली बातचीत पर निर्भर माना जा रहा है।
भाजपा के भीतर भी बढ़ सकती है सियासी सरगर्मी
विंध्य विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों ही राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े हैं। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारों को लेकर सामने आया विवाद राजनीतिक रूप भी ले सकता है। यदि समय रहते दोनों पक्षों के बीच अधिकारों और कार्यप्रणाली को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती है तो आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि डीपी अहिरवार की जॉइनिंग के बाद उन्हें CEO का वास्तविक प्रभार कब और किस आदेश के आधार पर दिया जाएगा? साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि अध्यक्ष की आपत्तियों और नियमों को लेकर उठाए गए सवालों पर शासन और प्रशासन का आधिकारिक रुख क्या रहता है।
इस खबर में अध्यक्ष डॉ. पंचू लाल प्रजापति द्वारा लगाए गए आरोपों को उनके पक्ष के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित उपाध्यक्ष, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जायेगा।





