---Advertisement---

Mauganj MP: स्वास्थ मंत्री के दावों की हवा निकालता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा, ताले में बंद है क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था।

Google News
Follow Us
---Advertisement---
🕒 Updated: 12 May 2026, 12:42 PM

Mauganj MP: स्वास्थ्य मंत्री के दावों की हवा निकालता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा, ताले में बंद है क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था।

 

 

 

 

मऊगंज (हनुमना)। एक तरफ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को चकाचक करने के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकते, वहीं दूसरी तरफ मऊगंज जिले के हनुमना विकासखंड अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है।

 

 

 

हालत यह है कि केंद्र इन दिनों पूरी तरह से डॉक्टर विहीन है। अस्पताल के मुख्य गेट पर सिटकनी (कुंडी) चढ़ी रहती है, जो न केवल अस्पताल के बंद होने का प्रमाण है, बल्कि क्षेत्र की गरीब जनता की उम्मीदों पर जड़ा हुआ ताला भी है।
अधिकारी मस्त, जनता त्रस्त

 

 

क्षेत्रीय ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) जिले में दौरे तो बहुत करते हैं, लेकिन उनके दौरे केवल बीएमओ (BMO) के ऑफिस की कुर्सियों और कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रह जाते हैं। हनुमना तहसील के पूर्वी क्षेत्र में स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र की सुध लेने वाला कोई नहीं है। अधिकारियों की इस अनदेखी का खामियाजा उन ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी मीलों दूर निजी अस्पतालों या जिला अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
प्रमुख बिंदु: व्यवस्था पर सवालिया निशान
बंद दरवाजा: अस्पताल के गेट पर लगी सिटकनी स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का जीता-जागता सबूत है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव: “आयुष्मान आरोग्य मंदिर” का नाम तो दे दिया गया है, लेकिन

 

 

 

 

यहां न तो डॉक्टर हैं और न ही इलाज की सुविधा।

पूर्वी क्षेत्र की अनदेखी: हनुमना के पूर्वी इलाके के हजारों लोगों के पास स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर केवल यह केंद्र था, जो अब सफेद हाथी साबित हो रहा है।
नेताओं के वादे बनाम हकीकत: उपमुख्यमंत्री के बड़े वादों और जमीनी स्तर पर बंद पड़े अस्पतालों के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है।

 

 

 

 

ग्रामीणों में आक्रोश

हाटा और आसपास के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की पदस्थापना नहीं की गई और अस्पताल नियमित रूप से नहीं खोला गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस “सिटकनी बंद” अस्पताल का ताला कब खोलता है या फिर जनता इसी तरह भगवान भरोसे रहने को मजबूर रहेगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment