Rewa MP:फ्री इलाज का दावा फेल सुपर स्पेशलिटी में स्ट्रेचर को धक्का लगाते हैं परिजन, दवाइयां बाहर से खरीदो!
150 करोड़ का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बना ‘शोपीस’, 51 वार्ड ब्वाय स्वीकृत पर गायब,ओटी तक मरीज को खुद ढोते परिजन, टेक्नीशियन-असिस्टेंट के भरोसे चल रहा सिस्टम
रीवा। 150 करोड़ की लागत से बना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल मरीजों के लिए ‘मुफ्त’ तो है, पर सुविधाएं ‘पेड’ से भी बदतर हैं। यहां इलाज के नाम पर शुल्क तो नहीं वसूला जाता, लेकिन स्ट्रेचर खींचने से लेकर दवा खरीदने तक का सारा बोझ परिजनों पर डाल दिया गया है।
51 वार्ड ब्वाय तैनात, लेकिन वार्ड में एक भी नहीं
सुपर स्पेशलिटी के लिए 51 वार्ड ब्वाय स्वीकृत हैं, पर हकीकत में एक भी वार्ड में नजर नहीं आता। मरीजों को ओटी और आईसीयू तक परिजन खुद स्ट्रेचर पर ढकेल कर ले जाते हैं। कई बार तो गंभीर मरीजों को भी परिजन ही उठाकर ले जाते दिखे।
टेक्नीशियन-असिस्टेंट के भरोसे ओटी-आईसीयू
ओटी और आईसीयू जैसे संवेदनशील वार्डों में टेक्नीशियन और असिस्टेंट ही सब संभाल रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते इलाज भगवान भरोसे है। बाहर से आए डॉक्टर भी जान बचाकर रफर करने में ही भलाई समझते हैं।
पर्ची फ्री, दवाई बाहर से
सबसे बड़ा दर्द दवाइयों का है। पर्चे पर लिखी एक भी दवा अस्पताल में नहीं मिलती। इंजेक्शन से लेकर सुई, मेडिकल किट तक परिजनों को बाहर से खरीदना पड़ रहा है। गरीब मरीजों के लिए ‘फ्री अस्पताल’ सबसे महंगा साबित हो रहा है।
डॉक्टर बोले- स्टाफ नहीं तो हम क्या करें
अधीक्षक डॉ. सुधीर सचान, प्रभारी डॉ. अखिलेश त्रिपाठी मानते हैं कि स्टाफ की भारी कमी है। एक-एक नर्स 15 बेड संभाल रही है। वार्ड ब्वाय हैं ही नहीं। मरीजों के साथ स्ट्रेचर के लिए जन संसाधन ही नहीं बचे। 4 में से 1 बेड खाली पड़ा है, फिर भी स्टाफ के अभाव में इलाज ठप है।





