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Mauganj MP:17 मिनट में 70 हजार की डील, फोन-पे पर 60 हजार की वसूली: मऊगंज हाईवे पर खाकी का ‘गुंडा टैक्स’, ट्रकों को बंधक बनाकर हो रही 2 लाख की खुलेआम डिमांड!

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🕒 Updated: 13 Jun 2026, 09:51 AM

Mauganj MP:17 मिनट में 70 हजार की डील, फोन-पे पर 60 हजार की वसूली: मऊगंज हाईवे पर खाकी का ‘गुंडा टैक्स’, ट्रकों को बंधक बनाकर हो रही 2 लाख की खुलेआम डिमांड!

 

 

 

डिजिटल करप्शन का सिंडिकेट: पूर्व डाटा ऑपरेटर मुकेश त्रिपाठी बना मऊगंज पुलिस का ‘प्राइवेट कैशियर’, वर्दी की काली कमाई को सफेद करने का ले रखा है ठेका।

जांच शुरू, फिर भी कुर्सी पर जमे ‘वसूलीबाज’:आईजी के निर्देश पर एसपी सुरेंद्र जैन ने शुरू की जांच, लेकिन स्टिंग और पक्के सबूतों के बाद भी यातायात प्रभारी और दागी आरक्षक अब तक पद से क्यों नहीं हटाए गए?

मऊगंज.जब कानून के रखवाले ही हाईवे के लुटेरे बन जाएं और खाकी वर्दी ‘गुंडा टैक्स’ वसूलने लगे, तो आम आदमी अपनी फरियाद लेकर कहां जाए? मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला एक ऐसा ‘डिजिटल वसूली कांड’ सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम को बेनकाब कर दिया है।

 

 

 

महज 17 मिनट! जी हां, सिर्फ 17 मिनट के अंदर सौदेबाजी होती है और फोन-पे के जरिए 60 हजार रुपये की रिश्वत वसूल ली जाती है। नेशनल हाईवे से गुजरने वाले वाहन अब मऊगंज पुलिस के लिए कमाई की ‘एटीएम मशीन’ बन चुके हैं। यातायात प्रभारी नरेश सिंह, हनुमना थाने के एक आरक्षक और इन सबके बीच काली कमाई को सफेद करने वाला पुलिस का दलाल—मुकेश त्रिपाठी! इन तीनों ने मिलकर ऐसा सिंडिकेट खड़ा कर दिया है, जिसके पक्के डिजिटल सबूत और स्टिंग ऑपरेशन की गवाही चीख-चीख कर सच बता रही है। आईजी के निर्देश पर एसपी मऊगंज ने जांच तो शुरू कर दी है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि ये दागी पुलिसवाले पक्के सबूतों के बाद भी अपनी कुर्सियों पर क्यों जमे हैं?

 

 

 

तारीख 31 मई, शाम के करीब 4 बजे। मऊगंज बायपास पर गैलेक्सी होटल के पास हाईवे से गुजर रहे ट्रक नंबर (BR45 GB3523) को यातायात प्रभारी नरेश सिंह रोकते हैं। पहले दस्तावेजों के नाम पर धमकाया जाता है और फिर शुरू होता है खाकी का असली खेल। ट्रक ड्राइवर से सीधे 2 लाख रुपये की डिमांड ठोक दी जाती है। धमकी मिलती है कि पैसे नहीं दिए तो गाड़ी जब्त होगी और 2 लाख से ज्यादा की पेनाल्टी अलग से लगेगी। घबराया हुआ वाहन चालक अपने मोटर मालिक को फोन करता है तब मोटर मालिक अपने दोस्त आशीष पांडे से मदद मांगता है, तब इस कहानी में एंट्री होती है पुलिस के ‘प्राइवेट कैशियर’ मकेश कुमार त्रिपाठी की।

 

 

 

अब एंट्री होती है पुलिस के प्रायवेट कैशियर दलाल मुकेश कुमार त्रिपाठी की ! यह वही मुकेश है, जो कभी हनुमना चेक-पोस्ट पर डाटा एंट्री ऑपरेटर था, लेकिन चेक-पोस्ट बंद होने के बाद अब इसने अवैध वसूली की रकम को सफेद करने का ठेका ले लिया है। मुकेश इस सौदेबाजी में हनुमना थाने के एक आरक्षक को उतारता है। आरक्षक ‘मेडिएटर’ बनकर सीधे यातायात प्रभारी के पास पहुंचता है और अपने ही फोन से यातायात प्रभारी की बात दलाल मुकेश से करवाता है।2 लाख की ये अवैध वसूली 70 हजार रुपये में फिक्स होती है। इसके बाद शुरू होता है फोन-पे का खेल। महज 17 मिनट के अंदर—शाम 5:28 पर 30 हजार, 5:37 पर 20 हजार और 5:45 पर 10 हजार रुपये—यानी कुल 60 हजार रुपये सीधे दलाल मुकेश त्रिपाठी के खाते में डाल दिए जाते हैं। बाकी बचे 10 हजार के लिए दलाल लगातार मोटर मालिक के मित्र का फोन घनघनाता रहता है।

 

 

 

हमारी तहकीकात और स्टिंग में वाहन मालिक और उनके मित्र आशीष पांडे ने इस पूरी लूट का खुलकर पर्दाफाश किया है। पुलिस की इस अवैध वसूली के कारण आज उस वाहन मालिक की गाड़ी की किस्त टूट चुकी है और उसका व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हो गया है। मऊगंज में यह खेल नया नहीं है। आखिर बिना खनिज विभाग के किसी कार्यवाहक एएसआई को नेशनल हाईवे पर ट्रकों को रोकने का अधिकार किसने दिया? अगले ही दिन तीन और ट्रेलरों को पकड़कर उनसे 6-6 हजार की डिमांड की गई, जो अंततः 500-500 रुपये की रिश्वत और 2000 के चालान पर जाकर सेटल हुई ऐसा आरोप वाहन चालको का है।

 

 

 

यातायात प्रभारी नरेश सिंह शुरू से ही विवादों में रहे हैं। इस पूरे खेल में हनुमना थाना प्रभारी अनिल काकड़े और वहां पदस्थ कुछ अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब इस ‘खुली लूट’ और फोन-पे के पक्के सबूतों को लेकर रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) गौरव राजपूत से सवाल किया गया, तो उन्होंने तुरंत मऊगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) सुरेंद्र जैन को जांच के निर्देश दिए। जांच शुरू भी हो चुकी है। अगर पुलिस निष्पक्षता से मुकेश त्रिपाठी और इन पुलिसवालों की कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाले, तो मामला पानी की तरह साफ हो जाएगा।

 

 

 

क्या वजह है कि ये अधिकारी आज भी उसी कुर्सी पर बैठकर खुलेआम अपना वसूली अभियान चला रहे हैं? क्या जांच पूरी होने तक साक्ष्यों से छेड़छाड़ का डर नहीं है? देखना होगा कि एसपी मऊगंज की यह जांच इन ‘वर्दी वाले लुटेरों’ के वसूली का पर्दाफाश कर पाती है, या फिर हर बार की तरह सिस्टम इन्हें बचाने की कोई नई गली निकाल लेता है।

बाइट /गौरव राजपूत पुलिस महानिरीक्षक रीवा जोन

बाइट / पीड़ित वाहन चालक

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