🕒 Updated: 13 Jun 2026, 10:26 AM
Mauganj MP:करोड़ों का केबलीकरण फेल! “फाल्ट खोजो अभियान” में उलझा बिजली विभाग,बिल वसूली में सख्त, बिजली देने में फेल! मऊगंज में “फाल्ट राज” से त्रस्त लोग!
मऊगंज .जिला मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था अब केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि जनता के साथ एक तरह का प्रशासनिक अन्याय बन चुकी है। लंबे समय से बिजली विभाग की लापरवाही, भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की चर्चा आम रही है, लेकिन जिला बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि कम से कम मूलभूत सुविधाओं में सुधार देखने को मिलेगा। लोगों ने सोचा था कि अब जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही के साथ काम करेंगे, खस्ताहाल व्यवस्था को सुधारा जाएगा और नगर को बार-बार होने वाली बिजली कटौती से राहत मिलेगी।
नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में पोल शिफ्टिंग और नए केबलीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। जनता ने भी धैर्य रखा और यह मान लिया कि कुछ समय की परेशानी के बाद व्यवस्था मजबूत हो जाएगी। लेकिन हुआ ठीक उल्टा। आज हालत यह है कि बिजली व्यवस्था पहले से ज्यादा चरमरा चुकी है। भीषण गर्मी में लोग दिन-दिन भर बिना बिजली के रहने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह फाल्ट है कहां❓हर बार एक ही जवाब — कहीं फाल्ट हो गया है, खोजा जा रहा है।
चार-चार, छह-छह और आठ-आठ घंटे तक बिजली गायब रहती है। विभाग के कर्मचारियों से पूछो तो बड़े आराम से कह दिया जाता है कि फाल्ट मिलते ही सप्लाई चालू कर दी जाएगी। ऐसा लगता है जैसे पूरा विभाग केवल फाल्ट खोजने के लिए ही रह गया हो।
विडंबना यह है कि जिस जिले में बिजली विभाग घंटों फाल्ट खोजता रहता है, वहां असली फाल्ट व्यवस्था के भीतर बैठा दिखाई देता है। सवाल यह भी उठता है कि करोड़ों के कार्यों के बाद भी यदि व्यवस्था इतनी कमजोर है कि हल्की समस्या में घंटों सप्लाई बाधित हो जाती है, तो आखिर काम की गुणवत्ता कैसी रही होगी?
जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
जनता ने लगातार दूसरी बार भरोसा जताया, जिला बनने के बाद विकास की उम्मीदें बढ़ीं, लेकिन सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी बदहाल हैं। विकास कार्यों की समीक्षा बैठकें कागजों तक सीमित दिखाई देती हैं। जनता यह देखने को तरस गई कि कभी जिम्मेदार लोग बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सख्ती से सवाल उठाते हों।
राजनीतिक मंचों पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन नगर की जनता पूछ रही है कि आखिर मूलभूत सुविधाओं पर चर्चा कब होगी? जनता को पांच किलो अनाज और भाषणों से ज्यादा जरूरत नियमित बिजली की है।
स्थिति यह है कि बिजली बिल लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। आम उपभोक्ताओं के बिल तीन से चार गुना तक पहुंच रहे हैं। बिल जमा करने में थोड़ी देर हो जाए तो विभाग तुरंत कनेक्शन काटने और कानूनी कार्रवाई की बात करता है। लेकिन जब विभाग खुद घंटों बिजली बंद रखकर लोगों का जीवन प्रभावित करता है, तब उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
भीषण गर्मी में छोटे बच्चे, बुजुर्ग, मरीज और व्यापारी सबसे ज्यादा परेशान हैं। पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है, व्यापार चौपट हो रहा है और लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो चुकी है।
अब जरूरत केवल फाल्ट खोजने की नहीं, बल्कि विभाग के भीतर बैठे उस असली फाल्ट पर लगाम लगाने की है जिसने पूरी व्यवस्था को खोखला कर दिया है। जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों को इस दिशा में तत्काल हस्तक्षेप करना होगा।
क्योंकि अगर व्यवस्था इसी तरह चलती रही, तो वह दिन दूर नहीं जब परेशान जनता खुद सड़क पर उतरकर विभाग का फाल्ट खोजने लगेगी।