---Advertisement---

Mauganj MP:पर्यावरण बचाने की बातें बड़ी, लेकिन मऊगंज में पौधों की रखवाली शून्य, शासकीय राशि का जम कर बंदरबांट,फोटो सेशन” बनकर रह गया हरियाली अभियान!

Google News
Follow Us
---Advertisement---
🕒 Updated: 06 Jun 2026, 07:37 AM

Mauganj MP:पर्यावरण बचाने की बातें बड़ी, लेकिन मऊगंज में पौधों की रखवाली शून्य, शासकीय राशि का जम कर बंदरबांट,फोटो सेशन” बनकर रह गया हरियाली अभियान!

 

 

पर्यावरण विशेष

हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस बड़े उत्साह और सरकारी आयोजनों के बीच मनाया जाता है। अधिकारी, जनप्रतिनिधि और संस्थाएं हाथों में पौधे लेकर कैमरों के सामने मुस्कुराते हुए दिखाई देते हैं। सोशल मीडिया पोस्ट, प्रेस विज्ञप्तियां और फोटो सेशन के बीच ऐसा माहौल बनाया जाता है मानो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा अभियान चल रहा हो। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का आयोजन बनकर रह गया है?

 

 

मऊगंज.मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की तस्वीर कुछ इसी गंभीर सच्चाई को उजागर करती है। बीते दो वर्षों में जिले में कई स्थानों पर बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया गया। कलेक्ट्रेट परिसर में मऊगंज के प्रथम कलेक्टर अजय श्रीवास्तव और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन द्वारा पौधारोपण किया गया। थाना परिसरों सहित अन्य सरकारी कार्यालयों में भी पौधे लगाए गए। उद्देश्य सराहनीय था, क्योंकि जिस तरह जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और बिगड़ता पर्यावरण मानव जीवन के लिए खतरा बनता जा रहा है, उसमें वृक्षारोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि इन अभियानों के बाद पौधों की देखरेख लगभग गायब हो जाती है। जिन स्थानों पर सैकड़ों पौधे लगाए गए थे, वहां आज मुश्किल से एक-दो पेड़ ही दिखाई देते हैं। कई जगहों पर तो पौधों का नामोनिशान तक नहीं बचा।

 

 

नगर परिषद द्वारा न्यू बस स्टैंड क्षेत्र, गायत्री मंदिर परिसर, सिविल अस्पताल की बाउंड्री के आसपास तथा वार्ड क्रमांक 11 सहित कई स्थानों पर बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किए जाने के दावे किए गए। वृक्षारोपण के नाम पर भारी-भरकम राशि भी खर्च हुई, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज वहां हरियाली नहीं बल्कि सूनी जमीन दिखाई देती है। सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ये पौधे गए कहां?
क्या पर्यावरण दिवस केवल फोटो खिंचवाने और कागजी उपलब्धियां गिनाने का माध्यम बनकर रह गया है? यदि वास्तव में पर्यावरण बचाने की चिंता है तो सिर्फ पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, सिंचाई और देखभाल की जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही जरूरी है।
आज मऊगंज सहित पूरा देश भीषण गर्मी, जल संकट और मौसम के असंतुलन का सामना कर रहा है। तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। ऐसे समय में यदि लगाए गए पौधे कुछ महीनों में ही सूख जाएं तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
जरूरत इस बात की है कि वृक्षारोपण अभियानों की केवल शुरुआत न हो, बल्कि उनके परिणाम भी धरातल पर दिखाई दें। हर लगाए गए पौधे की जिम्मेदारी तय हो। जिन विभागों और संस्थाओं ने पौधे लगाए हैं, उनसे यह भी पूछा जाए कि उनमें से कितने आज जीवित हैं।

 

 

पर्यावरण दिवस का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा जब कैमरों के फ्लैश से आगे बढ़कर धरती पर हरियाली दिखाई देगी। वरना हर वर्ष की तरह इस बार भी पौधे लगेंगे, फोटो खिंचेंगे, खबरें छपेंगी और कुछ महीनों बाद वही पौधे सूखकर गायब हो जाएंगे।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

June 6, 2026

June 6, 2026

June 6, 2026

June 6, 2026

June 6, 2026

June 6, 2026

Leave a Comment