---Advertisement---

Rewa MP: पुणे में चमकी बड़ी हर्दी की बेटी अश्मि शुक्ला, दो स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया रीवा जिले का मान,,

Google News
Follow Us
---Advertisement---
🕒 Updated: 24 Jan 2026, 06:03 PM

Rewa MP: पुणे में चमकी बड़ी हर्दी की बेटी अश्मि शुक्ला, दो स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया रीवा जिले का मान,,

रीवा । जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है रीवा की एक होनहार बेटी ने न सिर्फ जीत का परचम लहराया है बल्कि दो स्वर्ण पदक लाकर रीवा जिले का भी मान बढ़ाया है पुणे में 24 से 26 जनवरी तक आयोजित 8वीं राष्ट्रीय फिन स्विमिंग प्रतियोगिता में रीवा जिले के बड़ीहर्दी गाँव की होनहार तैराक अश्मि शुक्ला ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरा क्षेत्र गौरवान्वित हुआ है।
अश्मि शुक्ला मूलतः बड़ीहर्दी गाँव की निवासी हैं, हालांकि वर्तमान में वह भिलाई (छत्तीसगढ़) में रहकर वहीं नियमित अभ्यास कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
अश्मि, जयभारत मंच के राष्ट्रीय पदाधिकारी अनुराग शुक्ला की भतीजी हैं। उनकी इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर जयभारत मंच के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं में भी हर्ष का माहौल है और सभी ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं।
बड़ीहर्दी गाँव कभी तैराकी के लिए प्रसिद्ध हुआ करता था। इस गाँव में तैराकी की मजबूत परंपरा की नींव कैप्टन बजरंगी प्रसाद ने रखी थी, जिन्हें “तैराकी के पितामह” के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने समय में तैराकों की एक पूरी पीढ़ी तैयार की थी, जिसने क्षेत्र को राष्ट्रीय पहचान दिलाई थी।
अश्मि के पिता डॉ. अमरनाथ शुक्ला स्वयं भी एक अच्छे तैराक रह चुके हैं। वे न सिर्फ बेटी को बचपन से खेल के प्रति प्रेरित करते रहे हैं, बल्कि आज भी बड़ीहर्दी में तरणताल के जीर्णोद्धार के लिए प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क में रहकर प्रयासरत हैं, ताकि गाँव में फिर से तैराकी की संस्कृति को जीवित किया जा सके।
हालाँकि यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि बड़ीहर्दी गाँव में आज तैराकी और तरणताल दोनों ही लुप्त होने की कगार पर हैं। कभी जहाँ बच्चों की टोलियाँ सुबह-शाम अभ्यास करती थीं, वहाँ अब सुविधाओं के अभाव और उपेक्षा के कारण खेल संस्कृति कमजोर पड़ती जा रही है।
अश्मि शुक्ला की यह उपलब्धि एक बार फिर यह साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो ग्रामीण प्रतिभाएँ भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं। स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों ने प्रशासन से माँग की है कि बड़ीहर्दी में शीघ्र तरणताल का जीर्णोद्धार कर आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएँ विकसित की जाएँ, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा सकें।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

October 10, 2026

October 10, 2026

October 10, 2026

October 10, 2026

October 8, 2026

October 7, 2026

Leave a Comment