Rewa MP:जीएमएच का शिशु वार्ड फुल, एक बेड पर तीन-तीन बच्चे निमोनिया-वायरल फीवर ने घेरा!
मौसम में उतार-चढ़ाव और मच्छर जनित बीमारियों से बढ़ी मुसीबत, रोज 25-30 बच्चों को करना पड़ रहा भर्ती; डॉक्टर बोले- गंभीर केस ही कर पा रहे एडमिट
रीवा। लगातार बदल रहे मौसम का सबसे ज्यादा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। निमोनिया, वायरल फीवर और मच्छर जनित बीमारियां बच्चों को अपनी चपेट में ले रही हैं। हालात यह हैं कि गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल का शिशु वार्ड पूरी तरह भर चुका है। यहां एक-एक बेड पर दो से तीन बच्चों को लिटाकर इलाज करना पड़ रहा है। ओवरलोड के चलते चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की परेशानी भी बढ़ गई है।
रोजाना 25-30 नए मरीज, फ्लोर बेड लगाने की नौबत
जीएमएच में प्रतिदिन 25 से 30 बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि वार्ड में जगह कम पड़ने पर फ्लोर बेड तक लगाने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद जगह की कमी से जूझना पड़ रहा है। डॉक्टर रात-दिन बच्चों के उपचार में लगे हैं और ओवर टाइम ड्यूटी कर रहे हैं।
इंसेफलाइटिस के केस भी मिले, वायरल और निमोनिया का कहर
दिन में तेज गर्मी तो रात में ठंडक महसूस होने से बच्चे वायरल फीवर और निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। कुछ बच्चे तो इंसेफलाइटिस से भी पीड़ित पाए गए हैं। चिकित्सकों ने बताया कि बच्चों की इतनी संख्या में मरीज आ रहे हैं कि सभी का इलाज कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
एक्सपर्ट व्यू: सतर्कता जरूरी,वो “मामूली बुखार को भी न करें नजरअंदाज”
विभागाध्यक्ष शिशु रोग विभाग डॉ. नरेश बाजाज ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। अभिभावकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। बच्चों को साफ-सुथरे कपड़े पहनाएं और खान-पान का विशेष ध्यान दें। यदि किसी बच्चे को मामूली बुखार और सर्दी-जुकाम भी है तो तत्काल चिकित्सक के पास पहुंचकर उपचार कराना चाहिए।
गंभीर बच्चों को ही भर्ती, OPD 5 गुना बढ़ी
चिकित्सकों ने बताया कि वायरल, निमोनिया और इंसेफलाइटिस से ग्रसित बच्चों की संख्या ज्यादा है। प्रतिदिन 5 से अधिक बच्चों की OPD हो रही है। इनमें से जो गंभीर अवस्था में होते हैं, केवल उन्हीं को भर्ती किया जा रहा है। शिशु वार्ड में जगह न होने के कारण बाकी अन्य बच्चों को दवाएं और जरूरी सुझाव देकर घर भेजा जा रहा है।
मच्छरों का प्रकोप बढ़ा बच्चों पर सीधा असर
इन दिनों मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। दिन में तेज गर्मी तो रात में ठंडक महसूस हो रही है। इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ रहा है। मच्छरों की संख्या भी इस मौसम में बढ़ गई है, जिसके चलते मच्छर जनित बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। यही वजह है कि शिशु रोग वार्ड में इलाज कराने वाले बच्चों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।





