Rewa MP:सरकारी डॉक्टरों में ‘प्राइवेट प्रैक्टिस’ की होड़ ड्यूटी छोड़ शहर से गांव तक क्लीनिक, मरीज भगवान भरोसे!
सार्थक ऐप में हाजिरी, मौके से गायब त्योंथर-चाकघाट के डॉक्टर अस्पताल में नहीं,अपने क्लीनिक में मिलते हैं 326 उपस्वास्थ्य केंद्र होने पर भी बुखार का इलाज नहीं
रीवा। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं। सरकारी अस्पतालों में पदस्थ डॉक्टर ड्यूटी के नाम पर सिर्फ ‘सार्थक ऐप’ पर हाजिरी लगाते हैं और फिर निकल पड़ते हैं अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस पर। शहर से लेकर गांव तक डॉक्टरों के क्लीनिक धड़ल्ले से चल रहे हैं, लेकिन अस्पतालों में मरीज डॉक्टर का इंतजार करते रह जाते हैं।
कहां-कितने डॉक्टर गायब
– सिविल अस्पताल त्योंथर: स्वीकृत 8, पदस्थ 8, मिलते हैं 2
– सीएचसी गोविंदगढ़: स्वीकृत 4, पदस्थ 4, मिलते हैं 1
– चाकघाट: स्वीकृत 4, पदस्थ 2, मिलते हैं 0
– जवा: स्वीकृत 4, पदस्थ 1, मिलते हैं 0
– सिरमौर: स्वीकृत 8, पदस्थ 6, मिलते हैं 3
त्योंथर सिविल अस्पताल और सीएचसी चाकघाट में पदस्थ डॉक्टरों की सबसे अधिक शिकायतें हैं। सीएमएचओ कार्यालय भी मानता है कि डॉक्टर अस्पताल में कम, अपने क्लीनिक में ज्यादा मिलते हैं।
326 उपस्वास्थ्य केंद्र, फिर भी इलाज नहीं
जिले में 5 सिविल अस्पताल, 9 सीएचसी और 33 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 326 उपस्वास्थ्य केंद्र हैं। फिर भी स्थानीय स्तर पर मामूली बुखार और पेट दर्द का इलाज नहीं मिलता। मरीज सीधे जिला अस्पताल रीवा रेफर कर दिए जाते हैं। मऊगंज सिविल अस्पताल अब अप्रचलित होकर जिला चिकित्सालय बन चुका, लेकिन अंचल के सारे मरीज जिला अस्पताल रीवा में ठेले जा रहे हैं।
डॉक्टरों का ‘साइड बिजनेस’
जांच में सामने आया कि कई डॉक्टरों ने बीड-शहडोल स्टेट हाईवे के किनारे, जवा की बई बंदर जाति, चाकघाट बाजार और बाउंड्री एरिया में खुलेआम क्लीनिक खोल रखे हैं। सिविल अस्पताल त्योंथर के डॉक्टर सीधी में अपना क्लीनिक चलाते हैं।
सबसे बड़ा सवाल
जब वे क्लीनिक में मरीजों का उपचार कर ही रहे हैं तो अस्पताल में मरीजों को भगवान भरोसे क्यों छोड़ा जा रहा है? सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने अस्पताल, डॉक्टर्स क्वार्टर, नर्सेस क्वार्टर बनाने के साथ ही सारी सुविधाएं दे रही है। लेकिन चिकित्सकों में अनुशासन रखना मुश्किल हो रहा है।
सीएमएचओ डॉ. यत्नेश त्रिपाठी बोले:
शिकायतें सही हैं। पीएचसी एवं सिविल अस्पताल के चिकित्सकों को पत्र जारी कर मुख्यालय में ठहरने और सेवाएं देने को कहा गया है। टीम बनाकर जांच करेंगे।
सरकारी अस्पताल रेफर सेंटर बने, डॉक्टरों की जेब भर रही। स्वास्थ्य विभाग कब जागेगा?





